वाड्रा-DLF जमीन सौदे में नया मोड़ आया है. सौदे की जांच के आदेश से पेज ही गायब हैं. इस मामले में पिछली सरकार ने जांच के आदेश दिए थे.
आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका द्वारा आरटीआई के तहत फाइल की गई याचिका में स्टेट पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर डीआर वाधवा ने जवाब दिया और बताया, 'आदेश में लगे नोट से पेज नंबर 1 और 2 गायब है और यही वजह है कि याचिकाकर्ता को ये पेज उपलब्ध नहीं कराए जा सकते हैं.' फैसले से संबंधित सभी महत्वपूर्ण टिप्पणियां उन्हीं दो पेज में थे, जो अभी गायब हैं.'
जब इन गायब पेज के बारे में मुख्य सचिव पीके गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'खेमका ने आरटीआई के जरिए कुछ दस्तावेजों की मांग की थी, हमने कागज भेज दिए हैं, जिसमें से दो पेज नहीं मिल पा रहे हैं. इसकी जांच की जा रही है.' खेमका ने इन गायब पेज की शिकायत हरियाणा के चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर और चीफ सेक्रेट्री से की है.
खेमका ने अपनी शिकायत में कहा कि दो पेज में दर्ज टिप्पणी में महत्वपूर्ण सूचनाएं थीं और यह भी था कि कैसे अवैध तरीके से जांच के लिए समिति का गठन किया गया था.
आपको बता दें, जून 2014 में खेमका ने उन दस्तावेजों की मांग की, जिससे की यह पता चल सके कि वाड्रा को क्लीनचिट देने वाली समिति का गठन कैसे हुआ. खेमका ने गुड़गांव जिले के शिकोहाबाद में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीन का दाखिल खारिज रद्द कर दिया था.
उस समय हरियाणा की भूपेंदर सिंह हुड्डा की सरकार ने इस मामले की जांच के लिए 19 अक्टूबर 2012 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया. इसमें तीन आईएएस ऑफिसर कृष्ण मोहन, केके जालन और राजन गुप्ता थे.