
सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) टीम ने फर्जी दस्तावेज बनवाने के मामले में एक मुस्लिम युवक और नेपाल मूल की एक हिंदू महिला को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से चार आधार कार्ड (Aadhaar Card), एक पैन कार्ड (PAN Card) और 75 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं. यह कार्रवाई अल्थान पुलिस थाना क्षेत्र के मिनी गोवा जाने वाली सड़क से की गई.
जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी 29 वर्षीय सुल्तान उर्फ सुनील मंडल अब्दुल शेख, मूल निवासी मुस्लिमपाड़ा (पश्चिम बंगाल) और 34 वर्षीय स्मिती उर्फ स्वाति पटेल उर्फ इशिका सिंह सुंदरसिंह तमग, मूल निवासी सुंदरिजलगाम (नेपाल) हैं. दोनों पहले भी वेश्यावृत्ति के मामले में पकड़े जा चुके हैं. सुल्तान को सूरत के पूना थाना पुलिस ने पहले वेश्यावृत्ति के आरोप में गिरफ्तार किया था और उसने डेढ़ महीने जेल में बिताए थे.
यह भी पढ़ें: सस्ता सोना दिलाने के नाम पर 87 लाख की ठगी, सूरत पुलिस ने दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार
दरअसल, जेल से रिहा होने के बाद सुल्तान ने हिंदू इलाकों में रहने और नौकरी पाने के लिए फर्जी नाम से दस्तावेज बनवाने की योजना बनाई. उसने अपने एक परिचित की मदद से केवल 500 रुपये में 'सुनील मंडल' नाम से आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाया. इसी तरह उसने अपनी महिला मित्र स्मिती के लिए भी 'स्वाति पटेल' नाम से दस्तावेज तैयार करवाए. स्मिती ने बताया कि वह पति से विवाद के चलते अपनी पहचान छिपाकर हिंदू इलाके में रह रही थी.

एसओजी पुलिस इंस्पेक्टर अतुल सोनारा ने बताया कि पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर फर्जी दस्तावेज और गलत नाम से पहचान पत्र बनवाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. इसी दौरान खाटू श्याम मंदिर, अल्थान इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी. जांच में पता चला कि सुल्तान मुस्लिम होते हुए भी हिंदू नाम का इस्तेमाल कर रहा था, ताकि उसे हिंदू इलाके में घर और होटल में नौकरी मिल सके. वहीं, स्मिती ने भी अपनी असली पहचान छुपाकर आधार और पैन कार्ड बनवाए थे.
दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि यह दस्तावेज उन्होंने जानबूझकर फर्जी नाम से बनवाए थे. पुलिस ने इनके कब्जे से चार आधार कार्ड, एक पैन कार्ड और नकदी बरामद की है. स्मिती के खिलाफ पहले से इमोरल ट्रैफिकिंग प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) के तहत मामला दर्ज है और वह लंबे समय से सुल्तान के साथ रह रही थी.

वर्तमान में पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में शामिल अन्य व्यक्तियों की भी पहचान की जाएगी और फर्जी दस्तावेज बनवाने वाले नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश जारी है.