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छात्रों पर पुलिस एक्शन के खिलाफ IIM, जेएनयू के समर्थन में चलाया सिग्नेचर कैंपेन

देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) ने JNU छात्रों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान (सिग्नेचर कैंपेन) चलाया है. छात्रों ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने के लिए बार-बार किए जा रहे प्रयासों के खिलाफ हमलोग अपना विरोध दर्ज कराते हैं.

IIM के छात्रों ने दर्ज कराया विरोध IIM के छात्रों ने दर्ज कराया विरोध

  • 'लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने के लिए हो रही है पुलिस कार्रवाई'
  • 'ऐसे प्रयासों के खिलाफ हमलोग अपना विरोध दर्ज कराते हैं'

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन हुआ. इसे दबाने के लिए बाद में पुलिस द्वारा जो कार्रवाई हुई उसे लेकर जवाहर लाल विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र भी एकजुट हए. लेकिन कुछ दिनों बाद JNU कैंपस के अंदर भी नकाबपोश द्वारा छात्रों पर लाठी-डंडे चलाए गए. हालांकि JNU छात्र पिछले काफी दिनों से फीस बढ़ोतरी को लेकर कुलपति का विरोध कर रहे हैं. लेकिन एक धरा है जो छात्रों के प्रदर्शन को सरकार विरोधी नजरिए से देखता हैं. माना जा रहा है कि कैंपस के अंदर छात्रों के साथ हुई मारपीट भी इसी सोच की परिणति है. इस मामले को लेकर भले ही पुलिस की जांच चल रही हो लेकिन अब JNU छात्रों के समर्थन में अन्य विश्वविद्यालय के छात्र भी सड़क पर उतर गए हैं.

देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) अहमदाबाद ने JNU छात्रों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान (सिग्नेचर कैंपेन) चलाया है. छात्रों ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने के लिए बार-बार किए जा रहे प्रयासों के खिलाफ हमलोग अपना विरोध दर्ज कराते हैं. हमलोग देश में फैलायी जा रही हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं.

उन्होंने छात्रों के खिलाफ हिंसात्मक कार्रवाई के विरोध में लिखा, 'हमलोग निहत्थे छात्रों पर पुलिस की हिंसात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं. पुलिस असम के कॉटन विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया, अलीगढ़ और अन्य विश्वविद्यालयों में जिस तरीके से छात्रों पर कार्रवाई की गई वो निंदनीय है.'

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विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट सेवा बाधित करने को लेकर उन्होंने लिखा, 'डिजिटल आजादी लोगों को प्राइवेसी, लिबर्टी, शांतिपूर्ण विरोध का मौलिक आधिकार देता है. फाइंडिंग्स कमिटी ने पाया है कि भारत में कुल 134 बार इंटरनेट सेवा बाधित हुई है. विश्व की तुलना में भारत में साल 2018 में 67 प्रतिशत इंटरनेट शट डाउन हुआ. इससे आम लोगों को जो परेशानी हुई वो अलग बात है लेकिन अर्थव्यवस्था के नजरिए से भी देखें तो साल 2012-17 के बीच 3.04 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. ICRIER ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है.'

IIM छात्रों ने देश के कई हिस्सों में धारा 144 लागू किए जाने को लेकर लिखा कि अहमदाबाद समेत देश के कई हिस्सों में धारा 144 लगाई गई. बिना किसी जानकारी के इसे आगे भी बढ़ाया गया. इस तरह की कार्रवाई के जरिए लोगों से उनके विरोध प्रदर्शन के अधिकार को छीना गया जो किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए ठीक नहीं है.

छात्रों ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से संविधान के मुताबिक कानून-व्यवस्था बहाल करने की अपील की है.

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