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गुजरात में जोर पकड़ रहा किसान आंदोलन, कर्जमाफी की मांग कर किसानों ने बहाया दूध

गुजरात में फ़सल पर क़र्ज़माफ़ी की मांग के साथ बुधवार को अहमदाबाद सहित पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर किसानों ने दूध को ज़मीन पर बहा दिया. किसानों की मांग है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों का क़र्ज़ माफ़ कर दिया है, जबकि गुजरात सरकार ने अब तक किसानों के लिए किसी भी तरह कि कोई कार्रवाई नहीं की है.

किसानों ने बहाया दूध किसानों ने बहाया दूध

गुजरात में फ़सल पर क़र्ज़माफ़ी की मांग के साथ बुधवार को अहमदाबाद सहित पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर किसानों ने दूध को ज़मीन पर बहा दिया. किसानों की मांग है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों का क़र्ज़ माफ़ कर दिया है, जबकि गुजरात सरकार ने अब तक किसानों के लिए किसी भी तरह कि कोई कार्रवाई नहीं की है. इसके चलते ही किसानों के जरिये सभी जिला कलेक्टर को दिये गये आवेदनपत्र के बाद किसानों ने दूध बहा कर दूध की सप्लाई को बंद कर दिया है.

पिछले महीने गुजरात के बनासकांठा में किसानों ने आलू के भाव और खेती के लिए पानी न मिलने के कारण कड़ा विरोध जताया था और सड़कों पर आलू फेंक कर प्रदर्शन किया था.

बंद करेंगे शहरों को फल-सब्जी की आपूर्ति

किसानों के इस आंदोलन को ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ने अपना समर्थन दिया है. अल्पेश ठाकोर भी सड़क पर उतरे ओर दूध बहा कर अपना विरोध प्रदर्शित किया, अल्पेश का कहना है कि अगर सरकार ने किसानों के कर्ज को माफ़ नहीं किया तो आने वाले दिनों में फल-सब्जी जैसी चीजों की शहरों में आपूर्ति रोक दी जाएगी. साथ ही आने वाले दिनों में किसानों का ये आंदोलन ओर उग्रता से किया जाएगा.

 

गौरतलब है कि पिछले महीनों में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों ने कर्जमाफी जैसे कई मसलों को लेकर जोरदार आंदोलन किया था. इस दौरान मंदसौर में पुलिस की गोलीबारी से पांच किसान मारे गए थे. हाल में प्रधानमंत्री गुजरात दौरे पर गए थे और उन्होंने किसानों के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की थी. मोदासा में किसानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2022 में जब देश अपनी आजादी के 75वें साल का जश्न मना रहा होगा, हमारा लक्ष्य किसानों की आय डबल करने का है. बीज से लेकर फसल तक किसानं को अपनी हर चीज के लिए दुगुने पैसे मिलेंगे. उन्होंने कहा था कि मोदासा में बनाए गए एपीएमसी (एग्रीकल्चर प्रोडक्ट मार्केट कमिटी) से किसान अपनी फसल बेचने के लिए केंद्र सरकार के जरिए बनाए गए ई-नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि ईनाम यानी ई-नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट व्यवस्था, जिसके जरिए किसान अपने मोबाइल से दे के 400 से ज्यादा मार्केट में अपनी फसल ऑनलाइन बेच पाएंगे.

 

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