ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कोरोना को कंट्रोल करने के अहमदाबाद मॉडल की तारीफ की है. कोरोना का हाल जानने आई इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की टीम में शामिल डॉक्टर गुलेरिया ने शुक्रवार को गांधीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की तारीफ की और कहा कि टेस्टिंग से लेकर ट्रीटमेंट तक, काफी बदलाव हुआ है.
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क्या कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों को फिर से संक्रमण हो सकता है? इस सवाल के जवाब में एम्स के निदेशक ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई केस सामने नहीं आया है. उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि ये एंटीबॉडी पर निर्भर करता है कि वो किस तरह से प्रोटेक्ट करती है. एम्स निदेशक ने कहा कि गुजरात में अब नए केस की रफ्तार और डेथ रेट, दोनों में ही काफी कमी आई है. उन्होंने कहा कि अहमदाबाद में जिस रणनीति पर काम किया गया, उसे दूसरे शहरों में भी लागू किया जा सकता है.
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डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि धनवंतरि रथ एक अच्छा मॉडल है, जिससे लोगों को उनके घर तक पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है. इससे गैर कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में काफी सहयोग मिला है. एम्स निदेशक ने मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर की चर्चा करते हुए कहा कि दो सप्ताह में ही 1000 बेड का अस्पताल भी तैयार कर लिया गया है. इससे भी बहुत फर्क पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अस्पताल में ही ऑक्सीजन प्लांट भी लगाया जा रहा है. इससे भी कोरोना के हालात में परिवर्तन की उम्मीद है.
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डॉक्टर गुलेरिया ने सूरत के डॉक्टरों से भी बात करने की जानकारी देते हुए कहा कि वहां भी रणनीति बनाई जा रही है. कुछ ही दिनों में डेथ रेट कम हो जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले अहमदाबाद में भी इसी तरह का डेथ रेट था. वहीं, डॉक्टर विनोद पॉल ने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान ने देश में कोरोना संक्रमितों की तादाद सात करोड़ पहुंचने की संभावना जताई है, लेकिन यह अंतिम आंकड़ा नहीं है. उन्होंने दावा किया कि देश में कोरोना की महामारी को रोकने की दिशा में अच्छा काम हुआ है. अन्य देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर है. डॉक्टर पॉल ने जल्द वैक्सीन बना लिए जाने का भी दावा किया.