बीते दिनों हुई दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग काउंसिल की बैठक में ये बात सामने निकलकर आई कि केंद्र सरकार ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को फटकार लगाई है. मोदी सरकार ने कहा है कि स्वच्छता अभियान के लिए जो फंड केंद्र सरकार ने दिया है उसे केवल स्वच्छता अभियान में ही ख़र्च किया जाए. ग़ौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने इस फंड को दूसरे कामों में भी इस्तेमाल कर लिया है, जिसके बाद केंद्र सरकार के शहरी एवं विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के सीनियर अधिकारियों को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई है.
केंद्र सरकार ने दिए हैं सौ करोड़ रूपये
स्वछता अभियान के लिए तीनों ही नगर निगम को सौ करोड़ रुपया का पैकेज केंद्र सरकार ने दिया हुआ है. इस पैकेज के साथ एक शर्त भी होती है कि केंद्र सरकार द्वारा बताए गए कामों में भी ही इसे ख़र्च किया जाना चाहिए. वायु प्रदूषण को ख़त्म करने जैसे कार्य में इससे इसे इस्तेमाल करना चाहिए है, जबकि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इस फंड से कई मशीनरी और गाड़ियां ख़रीद डाली है. सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने नगर निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ़ तौर पर कहा है कि आगे से इस पैसे से जो भी काम होगा उसकी पहले अनुमति शहरी विकास मंत्रालय से लेनी होगी.
गाड़ियां ख़रीद में होता है कमीशन का खेल
दरअसल, दिल्ली नगर निगम में कमीशनखोरी का खेल किसी से छिपा नहीं है. कई मौक़े ऐसे भी आए हैं जब दिल्ली नगर निगम में सैलरी आदि के लिए आए फंड को अधिकारियों ने गाड़ी ख़रीद में इस्तेमाल कर लिया है. बताया जाता है कि इसमें कमीशनबाज़ी का बड़ा रोल होता है. दिल्ली नगर निगम हर साल करोड़ों रुपया की गाड़ियां ख़रीदती है हालांकि नगर निगम के गोदामों में अभी भी नई गाडियां खड़ी है, जिन्हें इस्तेमाल तक नहीं किया गया है.