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दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा पोलो असोसिएशन और एयरफोर्स के बीच का घमासान

झगड़े की शुरुआत मार्च 2016 में हुई जब सफदरजंग एयरफोर्स स्टेशन और जयपुर पोलो ग्राउंड के बीच एयरफोर्स ने दीवार बनानी शुरू की. आईपीए ने पहली चिट्ठी 19 मार्च को एयरफोर्स के कमांडिंग अफसर पवन मोहाय को लिखी जिसमें एयरफोर्स की गैरकानूनी दीवार के निर्माण पर सवाल पूछे.

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दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

क्या दिल्ली के सफदरजंग एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा को लेकर कोई नया खतरा पैदा हो गया है? कम से कम एयरफोर्स तो इसी बात का हवाला देकर एयरफोर्स स्टेशन और जयपुर पोलो ग्राउंड के बीच ऊंची दीवार खड़ी कर रही है.

इस दीवार के निर्माण को लेकर देश में पोलो खेलों के विकास और टूर्नामेंट्स आयोजित करने वाली संस्था इंडियन पोलो असोसिएशन यानी आईपीए और भारतीय एयरफोर्स के बीच इतनी बढ़ी कि मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया. पोलो असोसिएशन ने एयरफोर्स पर आपराधिक रवैये की धमकियां देने और असोसिएशन की जमीन का घेराव करने का आरोप लगाया है तो वहीं एयरफोर्स ने जमीन पर दीवार बनाने को लेकर सुरक्षा कारणों की सफाई दी है.

दीवार की दादागीरी: दिल्ली हाईकोर्ट में पोलो और एयरफोर्स के बीच घमासान
झगड़े की शुरुआत मार्च 2016 में हुई जब सफदरजंग एयरफोर्स स्टेशन और जयपुर पोलो ग्राउंड के बीच एयरफोर्स ने दीवार बनानी शुरू की. आईपीए ने पहली चिट्ठी 19 मार्च को एयरफोर्स के कमांडिंग अफसर पवन मोहाय को लिखी जिसमें एयरफोर्स की गैरकानूनी दीवार के निर्माण पर सवाल पूछे.

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मार्च बीता, अप्रैल बीता, मई बीता और जून भी बीत गया. एयरफोर्स दीवार तो बनाती रही लेकिन 14 जुलाई तक चिट्ठियों का कोई जवाब नहीं दिया. लिहाजा आईपीए एयरफोर्स के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गयी. हाईकोर्ट में मैंडामस रिट यानी परमादेश लेख दाखिल कर आईपीए ने एयरफोर्स से सारे निर्माण रोकने और यथास्थिति बहाल करने की मांग की है.

14 जुलाई की चिट्ठी में एयरफोर्स ने पठानकोट एयरबेस हमले का दिया हवाला आखिरकार 14 जुलाई को एयरफोर्स स्टेशन के मुख्य प्रशासकीय अधिकारी आदित्य जैन ने दीवार बनाने की वजह कुछ यूं बताई- “इस दीवार का निर्माण पूरे देश में रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर उठे खतरे के मद्देनजर किया जा रहा है.

खासतौर पर पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद. यही नहीं, दीवार के निर्माण की स्वीकृति शहरी विकास मंत्रालय ने दी है. वैसे भी जयपुर पोलो ग्राउंड का उपयोग एयरफोर्स और आईपीए दोनों करते रहे हैं.”

'एयरफोर्स की नीयत है खराब'
आईपीए के दिल्ली जोन के स्टीवर्ड अधिराज सिंह का कहना है कि एयरफोर्स की नीयत में खोट इसी बात से जाहिर हो जाता है कि वो अब तक इस जमीन के साझा इस्तेमाल होते रहने की बात करती है. अगर बात सिर्फ सुरक्षा की होती तो एयरफोर्स इस दीवार का निर्माण एयरफोर्स स्टेशन और जयपुर पोलो ग्राउंड की सीमा पर करता ना कि पोलो ग्राउंड के बीचों- बीच. आईपीए की ओर से याचिका दाखिल करने वाले वकील अमित त्यागी ने कहा कि पठानकोट एयरबेस हमले का डर और सुरक्षा का हवाला देकर पोलो ग्राउंड की जमीन पर एयरफोर्स अवैध कब्जा करना चाहता है. इस दीवार का निर्माण कर एयरफोर्स जो कर रही है वो फौज के सम्मान और मूल्यों के खिलाफ है. बहरहाल, मामले की सुनवाई अक्टूबर में होनी है.

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