एमसीडी में एक और पार्किंग घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. जहां पार्किंग माफिया ने एमसीडी अधिकारियों से मिलकर एमसीडी को ही करोड़ों का चूना लगाया दिया. ईडीएमसी ने करतार नगर में पार्किंग ठेकेदार को 600 मीटर का पार्किंग स्पेस अलॉट किया था, पर ठेकेदार ने एमसीडी अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर उसे 6000 मीटर में तब्दील कर दिया. यानी अब ये ठेकेदार अलॉट हुई जगह से 10 गुणा ज्यादा जगह का गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल कर रहा है. ऐसा ही कुछ गांधीनगर के पास कैलाश नगर रोड की पार्किंग का है. इस रोड पर तय स्पेस से कई गुणा ज्यादा जगह का इस्तेमाल किया जा रहा है.
ईडीएमसी स्टैडिंग कमेटी के पूर्व चेयरमैन महक सिंह का कहना है, ‘जब मै चैयरमैन था तो मेरे ही कार्यकाल में 600 मीटर का अलॉटमेंट दिया गया, लेकिन उसे 6000 मीटर बना दिया गया. ये बड़ा घोटाला है एमसीडी को करोड़ों का चूना लग रहा है.
दरअसल पार्किंग माफिया ने पुलिस के साथ भी समझौता कर रखा है. इसीलिए बिना जांच किए पुलिस ने करतार नगर पार्किंग को 6000 मीटर के कागज की रिसीविंग आसानी से दे दी. ये गोरखधंधा किस तरह से चल रहा है ये जानकर कोई भी हैरत में रह जाएगा. जब सांठगांठ के जरिए जगह ले ली जाती है तो फिर यही ठेकेदार उसी जगह को छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग ठेकेदारों को दे देता है और मोटा मुनाफा हासिल करता है.
पार्किंग माफिया के साथ मिलीभगत के चलते संबंधित अधिकारी ने भी अपने कंप्यूटर में 600 मीटर को 6000 मीटर कर दिया. कुल मिलाकर ये पूरी दाल ही काली है. ठेकेदार एमसीडी को अलॉट किए गए स्पेस की एवज में हर महीने 2.68 लाख रुपये का भुगतान करता है. यही हालत हर उस पार्किंग का है जहां आपको जगह ना होते हुए भी बेतहाशा गाडिया खड़ी हुई नजर आएंगी. मसलन कैलाश नगर में पार्किग के नियमानुसार एक ही लाइन में गाड़ियां खड़ी होनी चाहिए, लेकिन यहां के हालात देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां कैसे कानून की धज्जियां उड़ रही हैं.
ईस्ट दिल्ली एमसीडी ने जुलाई में 77 साइटों पर पार्किंग शुरू करने का आदेश दिया है. लेकिन आदेश को दो महीने भी नहीं बीते और पार्किंग का गोरखधंधा शुरू हो गया. ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इसकी भनक नहीं है. सारे विभाग सब जानते है, लेकिन कोई कुछ बोलेगा नहीं, क्योंकि समय पर सबके पास उनका हिस्सा पहुंच जाता है.