दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के साथ-साथ दूसरे तरीके के बुखार और यहां तक कि मलेरिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है. अस्पतालों में जगह तक नहीं बची है लेकिन अगर आपको लगता है कि मच्छरों पर काबू पाने के लिए जिम्मेदार दिल्ली नगर निगम मच्छरों पर काबू पाने के लिए अपनी तरफ से बेहतर कोशिश कर रही है तो आप गलत हैं. हकीकत ये है कि नगर निगम इस मामले में फिसड्डी साबित हो रही है दिल्ली में जहां डेंगू और चिकनगुनिया ने कहर बरपा रखा है तो वही दूसरी तरफ ये खुलासा हुआ है कि नगर निगम के पास तो कर्मचारी ही नहीं.
कई सालों से नहीं हुई नियुक्तियां
एमसीडी चाहे लाख दावे करें लेकिन हकीकत कुछ और ही है दिल्ली में डेंगू के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं तो रोकथाम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है. सूत्रों के मुताबिक उत्तरी निगम के पास 24 प्रतिशत कर्मचारियों की जगह खाली है. लेकिन फिर भी कोई नई नियुक्तियां नहीं हो रही है. दूसरी तरफ पूर्वी दिल्ली नगर निगम का हाल तो उससे भी बुरा है. पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 35 प्रतिशत कर्मचारी ही नहीं है दोनों ही नगर निगमों ने कई सालों से नई नियुक्तियां ही नहीं की है.
दरअसल उत्तरी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं. इसके लिए केजरीवाल सरकार को ही दोषी ठहराया जा रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है जब कर्मचारी ही नहीं तो फिर डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारी कैसे रुकेगी?