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बदलेगी दिल्ली की सूरत, नाइटलाइफ सर्किट, स्टूडियो अपार्टमेंट्स...जानें Master Plan 2041 में और क्या?

दिल्ली के मास्टर प्लान के इस मसौदे में विकास मानदंडों के लिए तीन अहम एडिशंस- वर्टिकल मिक्सिंग, ग्रीन-ब्लू फैक्टर और ट्रेडेबल फ्लोर एरिया-शामिल हैं. ड्राफ्ट में महामारी को देखते हुए आइसोलेशन के लिए भी जगह बनाने की बात कही गई है.

DDA Master Plan 2041 DDA Master Plan 2041
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डीडीए ने दिल्ली के मास्टर प्लान 2041 का मसौदा पेश किया
  • ड्राफ्ट में भविष्य में दिल्ली के डेवलपमेंट की जानकारी दी गई है
  • लोग 45 दिनों में ड्राफ्ट पर अपने सुझाव भी दे सकते हैं

दिल्ली के मास्टर प्लान (MPD) 2041 का मसौदा डीडीए द्वारा पब्लिक डोमेन में रख दिया गया. इसमें भविष्य के लिए तैयार होने वाली राजधानी में वर्टिकल मिक्सिंग, ट्रेडेबल फ्लोर एरिया रेशियो और ग्रीन-ब्लू फैक्टर शामिल हैं. दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा तैयार किए गए इस मसौदे में राजधानी में अगले 20 सालों में शहर की क्या-क्या जरूरतें होंगी, उसकी जानकारी दी गई है. साथ ही 45 दिनों में जनता के सुझावों और आपत्तियों के बारे में भी पूछा गया है.

एमपीडी के इस मसौदे में विकास मानदंडों के लिए तीन अहम एडिशंस- वर्टिकल मिक्सिंग, ग्रीन-ब्लू फैक्टर और ट्रेडेबल फ्लोर एरिया-हैं. राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले समय में नाइटलाइफ सर्किट, स्टूडियो अपार्टमेंट्स, एजुकेशन हब आदि बनाने की बात ड्राफ्ट में की गई है. डेवलपमेंट कंट्रोल नॉम्स का विशेष प्रावधान हैं जो दिल्ली के मास्टर प्लान (एमपीडी) के लैंड यूज प्लान और नीतियों के ढांचे के अंतर्गत डेवलपमेंट को रेग्युलेट करते हैं. सभी डेवलपमेंट, विस्तार, इस्तेमाल में परिवर्तन, साइट परिवर्तन, री-कंस्ट्रक्शन या फिर किसी भी बिल्डिंग का पुनर्निर्माणइन मानदंडों द्वारा तय किया जाएगा.

ड्राफ्ट दस्तावेज में कहा गया है कि विकास का मिक्स्ड इस्तेमाल और प्लॉट्स में वर्टिकल मिक्सिंग को शहर में बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सभी सेवाओं, वर्क सेंटर्स और घरों की एक-दूसरे के नजदीक होने की उपलब्धता की सुविधा होगी. यह जरूरत के अनुसार आत्मनिर्भर आइसोलेशन जोन्स की सुविधा भी प्रदान करेगा. वर्टिकल मिक्सिंग एक ही इमारत या एक जमीन में विभिन्न सुविधाओं या सेवाओं का कॉम्बिनेशन है. आम तौर पर, नीचे वाले फ्लोर में खुदरा स्टोर जैसे कमर्शियल सेट-अप होते हैं और ऊपरी मंजिलों को निजी इस्तेमाल के लिए रखा जाता है, जैसे- दफ्तर, रेशिडेंशियल यूनिट्स या गेस्ट हाउस.

ग्रीन-ब्लू फैक्टर (जीबीएफ) के प्रावधान का उद्देश्य नई विकास परियोजनाओं में हरे और नीले तत्वों के स्तर को सुनिश्चित करना और बनाए रखना है. इससे सभी विकास परियोजनाओं में रूफ गार्डन, टैरेस गार्डन, ग्रीन वॉल्स, लैंडस्केप स्ट्रक्चर बन सकेगा. ड्राफ्ट में आगे कहा गया है कि टीडीआर नीति के तहत, गैर-उपयोगी एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) को अन्य साइटों पर इस्तेमाल करने की अनुमति है. मसौदे में यह भी कहा गया है कि टीडीआर केवल तभी दिया जाएगा जब भूमि या विकास के अधिकार सार्वजनिक उद्देश्य के लिए हों जैसे कि आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, ऐतिहासिक स्थलों का फिर से निर्माण, शहरी गरीबों के लिए आवास आदि.

एमपीडी-2041 को मौजूदा हालातों को देखते हुए जीआईएस (भौगोलिक इन्फोर्मेशन सिस्टम) प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को 18 प्लानिंग जोन्स में बांटा गया है. डेवलपमेंट को कंट्रोल करने के लिए 27 क्षेत्रों की पहचान की गई है.

 

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