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J-K के 20 जज दिल्ली में, तिहाड़ से लेकर स्कूल तक में ले रहे ट्रेनिंग

जम्मू कश्मीर के 20 जज पिछले एक हफ्ते से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. ये जज हर रोज दिल्ली में किसी न किसी नई जगह पर जाकर आम लोगों से मिल रहे हैं. कभी यह मानसिक अस्पताल पहुंचते हैं तो कभी किसी स्कूल जाकर बच्चों से मुलाकात करते हैं. यह सब करने के पीछे कारण भी बेहद दिलचस्प है. और उससे भी ज्यादा दिलचस्प ये है कि यह सब उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है.

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जम्मू कश्मीर के 20 जज दिल्ली में(फोटो- पूनम शर्मा)
जम्मू कश्मीर के 20 जज दिल्ली में(फोटो- पूनम शर्मा)

जम्मू कश्मीर के 20 जज पिछले एक हफ्ते से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. ये जज हर रोज दिल्ली में किसी न किसी नई जगह पर जाकर आम लोगों से मिल रहे हैं. कभी यह मानसिक अस्पताल पहुंचते हैं तो कभी किसी स्कूल जाकर बच्चों से मुलाकात करते हैं. यह सब करने के पीछे कारण भी बेहद दिलचस्प है. और उससे भी ज्यादा दिलचस्प ये है कि यह सब उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है.

दरअसल यह सभी जम्मू कश्मीर में अलग-अलग डिस्ट्रिक्ट मे बतौर जज वर्षों से काम करते आ रहे हैं और अब उन्हें जम्मू कश्मीर के जिलों में डिस्ट्रिक सेक्रेटरी बनाया गया है. इनका काम आम लोगों को कानूनी सहायता और जानकारी देने का है.

यह पहली बार है जब जम्मू कश्मीर के इन जज को ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा बनाया गया है और इन सबके पीछे जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल की कोशिशों का नतीजा है.

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दरअसल गीता मित्तल इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक चीफ जस्टिस रह चुकी हैं और कश्मीर जाने के बाद उन्होंने देखा कि जुडिशल सिस्टम में सुधार की गुंजाइश है. अगर दिल्ली की तर्ज पर जुडिशल सिस्टम काम करे तो जम्मू कश्मीर की जनता को इसका सीधा फ़ायदा मिलेगा.

जम्मू कश्मीर में फिलहाल सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के मामले एक ही जज सुनते हैं. उसके बाद जज लीगल सर्विस से जुड़े हुए काम भी देखते हैं. जम्मू कश्मीर में यह पहली बार है कि वहां हर जिले के लिए डिस्ट्रिक सेक्रेटरी नियुक्त किए गए हैं. उनका काम वही होगा जो दिल्ली में दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी का होता है.

पिछले 1 हफ्ते से यहां ट्रेनिंग ले रहे सभी जजों के लिए ट्रांसजेंडर राइट्स से लेकर पोस्को, मानसिक रोगियों से जुड़े अदालती मामले या फिर सीनियर सिटीजंस को मिलने वाली कानूनी सहायता तक की जानकारी दी जा रही है. और इन सभी जजों के लिए ट्रेनिंग का यह हिस्सा हर रोज एक नई जानकारी को जोड़ रहा है.

श्रीनगर से आए अदनान सैयद बताते हैं कि उन्होंने तिहाड़ जाकर देखा कि कैसे वहां कैदियों को स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ रोजगार देने के मौके दिए जा रहे हैं. पापड़, अचार से लेकर कैदियों को पेपर बनने तक की ट्रेनिंग दी जा रही है. अगर इसे श्रीनगर में भी शुरू किया जाए तो उसके नतीजे बेहद उत्साहित करने वाले हो सकते हैं.

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मेडिएशन से पारिवारिक झगड़ों से जुड़े मामले कैसे जल्दी सुलझाये जा सकते हैं, यह भी इन जजों को ट्रेनिंग में सिखाया गया है. इसके अलावा बच्चों के साथ सेक्सुअल वायलेंस से जुड़े मामलों में तुरंत क्या किया जाना चाहिए, या फिर किसी भी संवेदनशील मामले में गवाहों की सुरक्षा कितनी ज़रूरी है, और उनके लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए. ये सब जज दिल्ली की न्यायिक प्रकिया मे काम कर चुके अनुभवी लोगों से सीख रहे है.

दिल्ली लीगल सर्विस ऑथिरिटी में स्पेशल सेक्रेटरी गीतांजली गोयल जो इस ट्रेंनिंग प्रोग्राम का अहम हिस्सा हैं, बताती हैं कि जम्मू कश्मीर ऐसा राज्य है जहां मानव अधिकार से जुड़े हुए तमाम मामले सामने तो आते हैं लेकिन अक्सर पीड़ित लोगों को मदद नहीं मिल पाती. और फिलहाल दिल्ली में जजों को दी जा रही ट्रेनिंग शिकायतों के निपटारे में एक अहम रोल अदा कर सकती है.

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