आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का धरना खत्म हो गया है. लेकिन एक सवाल हर किसी के जेहन में है कि मंगलवार सुबह तक केंद्र सरकार को खरी-खरी सुनाने वाले केजरीवाल आखिर शाम ढलते-ढलते अचानक कैसे मान गए.
यकीनन समर्थकों से राजपथ भरने और गणतंत्र दिवस को धता बताने वाले केजरीवाल यूं ही नहीं माने हैं. दरअसल, दिल्ली पुलिस और उनके के लिए बीच का रास्ता निकालने की माथापच्ची करीब पांच घंटे चली है. सूत्रों की मानें तो इस पूरी डील के पीछे आम आदमी पार्टी सरकार को समर्थन दे रहे जेडीयू विधायक शोएब इकबाल ने अहम भूमिका निभाई है. आइए सिलसिलेवार ढंग से जानें, कैसे बनी बात...
समय: दोपहर 2 बजे...
धरना खत्म करवाने के लिए दिल्ली पुलिस की तरफ से एक बड़े अधिकारी ने मोर्चा संभाला. उधर, दिल्ली के जेडीयू विधायक शोएब इकबाल ने केजरीवाल को मनाने की बात पुलिस अधिकारियों से की. पुलिस ने अपने अधिकारियों के निलंबन और तबादले की मांग खारिज कर दी. लेकिन शोएब से कहा गया कि सावलों के घेरे में आए पुलिस वालों को छुट्टी पर भेजा जा सकता है.
समय: दोपहर 3 बजे, जगह: रेल भवन धरना स्थल
शोएब पुलिस का फॉर्मुला लेकर टीम केजरीवाल के पास पहुंचते हैं. अचानक केजरीवाल की गाड़ी में ही बैठक बुलाई जाती है. केजरीवल को बताया जाता है कि बुधवार तक रेल भवन का धरना स्थल खाली करना होगा. लेकिन टीम केजरीवाल अड़ जाती है कि मालवीय नगर के एसएचओ को हटाए बिना वह मानने वाले नहीं हैं.
समय: शाम 4 बजे
जेडीयू विधायक टीम केजरीवाल की बात लेकर पुलिस के उसी आला अधिकारी के पास पहुंचते हैं.
समय: शाम 5 बजे
धरना बंद कराने के इस फॉर्मूले की जानकारी दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग को दी जाती है. उपराज्यपाल खुद अरविंद केजरीवाल से बात करते हैं.
समय: शाम 6 बजे
टीम केजरीवाल प्रेस क्लब में मीटिंग बुलाती है. मीटिंग में धरना खत्म करने के उपलब्ध सभी फॉर्मूलों पर चर्चा होती है. फॉर्मूला तय होता है और यह भी तय किया जाता है कि यह सब मीडिया से बच-बचाकर करना है.
समय: शाम 7 बजे
उपराज्यपाल ने मालवीय नगर के एसएचओ और पहाड़गंज के पीसीआर वैन ऑपरेटर को छुट्टी पर जाने को कहा. जिसके बाद केजरीवाल ने धरना तोड़ा और इस तरह पुलिस समेत केजीरवाल की लाज बच गई.