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रिजर्व डिब्बे में घुसे जनरल के यात्री, पीड़ित परिवार को देना पड़ा 30 हजार का मुआवजा

राज्य आयोग ने ये बात एक व्यक्ति और उसके परिवार को 30 हजार रुपया मुआवजा देने का निर्देश देते हुए कहा. इस व्यक्ति ने एक आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत यात्रियों के कारण खुद को हुई असुविधा के चलते मुआवजे की मांग की थी.

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रेलवे स्टेशन
रेलवे स्टेशन

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि रेल के आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश रोकना रेलवे अधिकारियों की ड्यूटी है और ऐसा करने में उनकी विफलता सेवा में कोताही जैसा है. राज्य आयोग ने ये बात एक व्यक्ति और उसके परिवार को 30 हजार रुपया मुआवजा देने का निर्देश देते हुए कहा. इस व्यक्ति ने एक आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत यात्रियों के कारण खुद को हुई असुविधा के चलते मुआवजे की मांग की थी.

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उत्तर रेलवे को दिल्ली के निवासी देवकांत और उसके परिवार को राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया. इससे पहले मुआवजे की उनकी मांग को जिला फोरम ने खारिज कर दिया था. फैसले में कहा गया कि रेलवे अधिकारी आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश रोकने में असफल रहा जो रेलवे की सेवा में कोताही जैसा है और जिसके चलते शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न से गुजरना पड़ा.

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आयोग ने ये भी कहा कि रेलवे की ये ड्यूटी है कि वो सिर्फ अधिकृत व्यक्तियों को ही ट्रेन में यात्रा करने की इजाजत दे. देवकांत द्वारा दायर शिकायत के मुताबिक, वो और उनका परिवार 20 अक्तूबर 2009 को मूरी एक्सप्रेस के एक आरक्षित डिब्बे में अमृतसर से दिल्ली की यात्रा कर रहे थे. इसमें आरोप लगाया गया है कि यात्रा के दौरान लुधियाना रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ आरक्षित डिब्बे में घुस आई और जबर्दस्ती आरक्षित सीटों, ट्रेन के फर्श के साथ-साथ बाथरूम में भी बैठ गई. जिसके कारण रास्ता बंद हो गया.

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