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नोटबंदी के कारण कई फैक्ट्रियों पर पड़ा ताला

वी.के. सेठ ने कहा कि दूसरी यूनिट में भी जहां 20 से 25 कर्मचारी काम करते थे, वहां सिर्फ 5 कर्मचारी काम कर रहे है, जिसके कारण फैक्ट्री के प्रोडक्शन में लगातार कमी आ रही है.

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नोटबंदी से कारोबार पर असर
नोटबंदी से कारोबार पर असर

नोटबंदी के बाद से फैक्ट्री मालिकों और कर्मचारियों की हालत खराब है. पैसे की कमी के कारण ना तो प्रोडक्शन हो पा रहा है और ना ही कोई कर्मचारी काम पर आ रहा है, क्योंकि फैक्ट्री मालिकों को कर्मचारियों की तनख्वाह देने में परेशानी आ रही है.

नोएडा में अपनी फैक्ट्री चलाने वाले वी.के. सेठ को अपनी फैक्ट्री की एक यूनिट सिर्फ इसी कारण बंद करनी पड़ी क्योंकि कर्मचारी नहीं आ रहे है, जैसे तैसे पुराने कर्मचारियों से काम करवाया जा रहा है. वी.के. सेठ ने कहा कि दूसरी यूनिट में भी जहां 20 से 25 कर्मचारी काम करते थे, वहां सिर्फ 5 कर्मचारी काम कर रहे है, जिसके कारण फैक्ट्री के प्रोडक्शन में लगातार कमी आ रही है.

इसी तरह पिछले 17 वर्षों से फैक्ट्री चला रहे शरद जैन कहते है कि कर्मचारियों को सैलरी तो देनी है पर हाथ में कैश ही नहीं है, जिसके कारण कम ही कर्मचारियों को काम पर लगा रखा है. जिसके कारण फैक्ट्री का कुछ हिस्सा औऱ मशीनें बंद करनी पड़ी है.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद से ही धंधा काफी मंदा है, 1 महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं हो रहे है, पता नहीं बाकी बचे 20 दिनों में प्रधानमंत्री ऐसा क्या करेंगे कि कर्मचारियों की जिंदगी फिर से सामान्य हो जाए.

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