दिल्ली में पैदल चलने वाले लोग सुरक्षित नहीं हैं. आंकड़ों से पता चला है कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा जोखिम पैदल चलने वालों को होता है. पुलिस ने मंगलवार को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में 43 फीसदी मौतें पैदल चलने वालों की हुई हैं. इसके बाद 38 फीसदी मौतें सवार लोगों की हुई.
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में दिल्ली में हुए सड़क हादसों में 629 पैदल यात्रियों की मौत हुई और 1777 लोग घायल हुए. हालांकि पैदल यात्रियों के घायल होने की संख्या 2021 के मुकाबले गिरी है. जहां 2021 में 35.94 फीसदी लोग घायल हुए थे, ये संख्या गिरकर 34.16 फीसदी हो गई है.
दिल्ली में जान गंवाने वालों में 91 फीसदी पुरुष
पुलिस के मुताबिक, 2022 में सड़क दुर्घटना में मरने वालों में 91 फीसदी पुरुष थे. दुर्घटना में घायल होने वालों में से 86 प्रतिशत पुरुष थे. इसके अलावा जिन लोगों की मौत हुई है, उनकी अधिकतर उम्र 40 और उससे अधिक थी. जबकि घायल होने वाले पुरुषों की अधिकतम संख्या 19-30 आयु वर्ग में थी, जबकि महिलाओं का यही आंकड़ा 40 से ऊपर आयु वर्ग में था.
2022 में बाइक सवार 552 लोगों की मौत
एक अधिकारी ने कहा कि साल 2022 में 21.93 फीसदी हादसों में पीड़ितों ने अपनी जान गंवाई, जबकि साल 2021 में यह आकंड़ा 22.47 फीसदी था. पुलिस ने कहा कि पैदल यात्रियों के बाद सबसे ज्यादा मौतें बाइक चालकों की हैं. 2022 में दिल्ली में सड़क हादसों में 552 लोगों की मौत हुई, जबकि 2263 लोग घायल हुए. आंकड़ों से पता चला कि हर तीन मौतों या घायलों में से एक बाइक सवार था. पुलिस ने कहा कि एक महत्वपूर्ण तथ्य यह पता लगाया जा सकता है कि पीड़ितों के रूप में दोपहिया सवारों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है.
2-4 फीसदी ही साइकिल सवार होते हैं शिकार
बीते 8 सालों में सड़क हादसों के शिकार के रूप में साइकिल चालकों की हिस्सेदारी 2 से 4 फीसदी के आसपास बनी हुई है. पुलिस ने कहा कि सड़क हादसों में घायल होने वाले साइकिल चालकों का प्रतिशत पिछले 15 वर्षों में धीरे-धीरे कम हो रहा है और 2007 में 5.05 प्रतिशत से घटकर 2022 में 2.57 प्रतिशत हो गया है.
पैदल यात्रियों को कार की टक्कर से ज्यादा जोखिम
पुलिस ने कहा कि कार के सामने टकराने पर पैदल चलने वालों की मृत्यु का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है. जबकि कार टू कार टक्कर में 65 किलोमीटर प्रति घंटे पर गाड़ी में सवार लोगों की मौत का जोखिम 85 फीसदी है. उन्होंने कहा कि बाइक सवार के हेलमेट का सही इस्तेमाल करने से गंभीर चोटों के जोखिम में 42 फीसदी की कमी हो सकती है. जबकि सीट-बेल्ट पहनने से ड्राइवरों और आगे की सीट पर बैठे लोगों में मृत्यु का जोखिम 45 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है और पीछे की सीटों पर बैठे लोगों में मृत्यु और गंभीर चोटों का जोखिम 25 प्रतिशत तक कम हो जाता है.