भारतीय जनता पार्टी दिल्ली की सत्ता से 21 वर्ष का वनवास खत्म करने की कोशिश में है. लगातार दूसरी बार प्रचंड जीत के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज होने में सफल रही भाजपा अब दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भी आम चुनाव का फॉर्मूला आजमा सकती है.
सूत्रों की मानें तो भाजपा लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी उम्र की दीवार खड़ी कर सकती है. जैसे लोकसभा चुनाव के लिए 75 साल से अधिक उम्र वालों को टिकट नहीं दिया गया. ठीक उसी तरह से भाजपा विधानसभा चुनाव के लिए 60 और नगर निगम के चुनाव के लिए 45 वर्ष से अधिक उम्र वालों को टिकट नहीं देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
विधायकों को मिलेगी छूट
विधानसभा चुनाव के लिए सीटिंग विधायकों को इससे बाहर रखा जाएगा. हालांकि सूत्रों की मानें तो वर्तमान विधायकों को उम्र सीमा के दायरे में लाया जाए या नहीं, इस पर फैसला पार्टी आलाकमान लेगा. सूत्रों ने कहा कि प्रत्येक राज्य के चुनाव में परिस्थितियां अलग होती हैं. ऐसे में दिल्ली की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इससे छूट मिल सकेगी.
टिकट की रेस से बाहर हो सकते हैं कई दिग्गज
दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी करने के लिए भाजपा कमर कस रही है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान कड़े और बड़े निर्णय ले सकती है. टिकट के लिए अगर उम्र के फॉर्मूले का उपयोग किया गया तो दिल्ली बीजेपी के कई दिग्गज रेस से बाहर हो सकते हैं.
इनमें श्याम लाल गर्ग, नंद किशोर गर्ग, जय भगवान अग्रवाल, राम किशन सिंघल, मोहन सिंह बिष्ट, सुभाष सचदेवा और एचसीएल भगत जैसे नेता शामिल हैं. भाजपा के दो विधायकों, ओम प्रकाश शर्मा और जगदीश प्रधान की उम्र भी 60 वर्ष से अधिक है.
प्रदेश अध्यक्ष बोले, नहीं हुआ है फैसला
हालांकि दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि टिकट वितरण के लिए कोई फॉर्मूला तय नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि इसे लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है.