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सांस नहीं तो वोट नहीं, अब साफ हवा के लिए सोशल मीडिया पर अभियान

इस अभियान में कई एनजीओ, दिल्ली के स्कूली बच्चे, सफाईकर्मी, समाज सेवी और गरीब तबके के कामगार बच्चे शामिल किए गए हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो (रॉयटर्स)
प्रतीकात्मक फोटो (रॉयटर्स)

साउथ दिल्ली की सरकारी कॉलोनियों में हरे पेड़ों को काटकर सरकारी क्वार्टर बनाए जाने के विरोध में कई एनजीओ ने 'चिपको दिल्ली-एनसीआर' अभियान के सफल प्रयोग के बाद अब आम चुनाव के ठीक पहले सभी राजनीतिक पार्टियों को घेरने के लिए सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया है. इसे 'इंडिया अगेंस्ट पॉल्यूशन-नो सांस नो वोट' नाम दिया गया है.

इस अभियान में कई एनजीओ, दिल्ली के स्कूली बच्चे, सफाईकर्मी, समाज सेवी और गरीब तबके के कामगार बच्चे शामिल किए गए हैं. दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने वाले पर्यावरण समाजसेवी अनिल सूद ने कहा कि 'राजनेता वोट लेने आते हैं पर ये नहीं देखते कि हम सांस कैसी ले रहे हैं. क्या ये इलेक्शन मेनिफिस्टो में घोषणा नहीं करेंगे कि वो कैसे दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाएंगे?'

सूद ने ये भी कहा कि 'सांस लेना फंडामेंटल राइट है. वो दिन दूर नहीं जब हवा को लेकर जनांदोलन होगा. आपको बता दें कि  'माई राइट टू ब्रीद इंडिया' टि्वटर हैंडल पर ये कैंपेन दिल्ली, गुड़गांव के बाद अब कोलकाता पहुंच गया है. इसका मकसद राजनेताओं को प्रदूषण का भान कराना है. दिल्ली और केंद्र सरकार को जागरुक कराना है.

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देश की राजधानी की हवा की क्वालिटी में लगातार गिरावट जारी है. धुंध और कोहरे ने इसकी हालत और बिगाड़ दी है. हालांकि शुक्रवार को हवा की रफ्तार बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में थोड़ा सुधार आया और यह खतरनाक स्तर से अत्यंत खराब स्तर पर दर्ज हुआ. एयर क्वालिटी की निगरानी करने वाले सिस्टम सफर के मुताबिक, दिल्ली में अगर अच्छी बारिश हो तो हवा में तेजी से सुधार होगा. दिल्ली में हवा की दशा सुधरने की गुंजाइश बढ़ी है क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ से भारत के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश होने की संभावना है.

अभी हाल में पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम (एनसीएपी) की घोषणा की है. इसमें 2024 तक वायु प्रदूषण 20 से 30 फीसदी स्तर घटाने की तैयारी है. इस पर टिप्पीणी करते हुए ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया ने कहा, 'यह सुखद है कि इतने लंबे इंतजार के बाद देश में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अब एनसीएपी का अंतिम रूप हमारे सामने है. इसमें खास बात है कि 2024 तक 20 से 30 फीसदी स्तर घटाने का लक्ष्य रखा गया है. हम उम्मीद कर रहे थे कि इसमें अलग अलग सेक्टर के लिए लक्ष्य रखा जाता और कानूनी प्रावधान रखा जाता तो ये कार्ययोजना काफी मजबूत होती. हम उम्मीद करते हैं कि पर्यावरण मंत्रालय इस योजना को लागू करने में ज्यादा गंभीरता दिखाएगी.'

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दिल्ली में वायु प्रदूषण के साथ धुंध और कोहरे ने परेशानी बढ़ा दी है. घने कोहरे की वजह से दृश्यता शून्य रहने से कई ट्रेनें लेट चल रही हैं और कई उड़ानों का रूट बदला जा रहा है. दिल्ली में ठंड के मौसम में स्थित और भी खराब हो जाती है. अक्टूबर-नवंबर के आसपास दिल्ली से सटे राज्यों में पराली जलाए जाने से भी वायु प्रदूषण बढ़ जाता है. 

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