अरबपति बीएसपी नेता दीपक भारद्वाज की मर्डर मिस्ट्री सुलझ चुकी है. छोटे बेटे नितेश ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी नितेश ने कई बड़े खुलासे भी किए हैं.
सूत्रों की माने तो उसने पुलिस से कहा कि या तो मैं जिंदा रह सकता था या फिर मेरे पिता. उसने ये भी बताया कि उसके पिता शादी के तीन साल के बाद से ही उसकी मां को परेशान करने लगे थे. उन्हें पीटा भी करते थे, इन्हीं वजहों से नितेश के दिल में अपने पिता के प्रति नफरत भर गयी थी.
विदेश से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद साल 2005 में नितेश ने अपने पिता की कंपनी ज्वाइन की थी, लेकिन फिर भी कंपनी के पैसों पर उसका कोई अधिकार नहीं था.
मां और दोनों बेटों को दीपक भारद्वाज अपने पैसों को हाथ लगाने नहीं देते थे. उसने पुलिस को ये भी बताया है कि जो 50 लाख रुपये उसने बलजीत को सुपारी की रकम के तौर पर दिए थे वो पैसे भी उसे उसके पिता ने ही रखने के लिए दिए थे लेकिन साथ ही हिदायत दी थी कि वो उन पैसों को खर्च ना करे.