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पासपोर्ट में बायलॉजिकल फादर का नाम जरूरी नहीं: HC

एक महिला ने पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया था. फॉर्म और अन्य डॉक्यूमेंट में उसने अपने सौतेले पिता का नाम लिखा था, जबकि बर्थ सर्टिफिकेट में जैविक पिता का नाम था. इस पर पासपोर्ट अथॉरिटी ने उसे पासपोर्ट देने से मना कर दिया.

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पासपोर्ट के लिए अप्लाई करते समय अब जैविक पिता (बायलॉजिकल फादर) का नाम लिखना जरूरी नहीं होगा. फॉर्म में अब सौतेले पिता का नाम लिखने पर भी पासपोर्ट मिल जाएगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है.

दरअसल, एक महिला ने पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया था. फॉर्म और अन्य डॉक्यूमेंट में उसने अपने सौतेले पिता का नाम लिखा था, जबकि बर्थ सर्टिफिकेट में जैविक पिता का नाम था. इस पर पासपोर्ट अथॉरिटी ने उसे पासपोर्ट देने से मना कर दिया. अंत में महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाई कोर्ट ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए चार हफ्ते के भीतर सौतेले पिता के नाम के साथ ही महिला को पासपोर्ट जारी करने को कहा.

सिर्फ जैविक संबंध होने से माता-पिता का अधिकार नहीं
जस्टिस मनमोहन की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा, 'जैविक पिता ने महिला के पालन-पोषण में कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई है, ऐसे में अगर महिला की मां नए परिवार को कानूनी तौर पर शामिल करना चाहती है तो उसे रोका नहीं जा सकता.' उन्होंने कहा कि केवल जैविक संबंध होने से माता-पिता का अधिकार नहीं दिया जा सकता.

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महिला ने दी थी ये दलील
कोर्ट ने महिला की याचिका में दिए गए तर्कों को स्वीकार किया जिनमें कहा गया था कि उसका जन्म माता-पिता के अलग होने के बाद हुआ था और वह नहीं चाहती कि पासपोर्ट में उसके जैविक पिता का नाम आए. अगर सौतेले पिता का नाम पासपोर्ट में नहीं लिखा गया तो इससे आगे चलकर नौकरियों में उसे परेशानी आ सकती है. महिला ने यह भी कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि उसके जैविक पिता जीवित हैं या नहीं.

अथॉरिटी ने बताई थी ये वजह
पासपोर्ट अथॉरिटी ने कोर्ट से कहा था कि पासपोर्ट मैन्युअल 2010 के मुताबिक, जब तक जैविक पिता की मुत्यु नहीं होती है, तब तक किसी आवेदक के पासपोर्ट में उसके सौतेले पिता का नाम नहीं लिखा जा सकता है.

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