एम्स-दिल्ली की एक महिला गार्ड ने अपने मुख्य सुरक्षा अधिकारी पर यौन उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है, जिसके बाद हॉस्पिटल ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है. 15 अक्टूबर को जारी एक कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, जांच डॉ. के. के. वर्मा, डीन अकादमिक द्वारा की जाएगी. ये एससी/एसटी/ओबीसी की शिकायतों के निवारण के लिए संस्थान की समिति के प्रमुख हैं. जांच में डॉ. पुनीत कौर भी शामिल हैं जो HOD बायोफिजिक्स, जो यौन उत्पीड़न के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्ष हैं. दोनों समितियों को ज्ञापन जारी होने की तारीख से सात दिनों के भीतर साक्ष्य के साथ प्रारंभिक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है.
सूत्रों के अनुसार, महिला गार्ड ने आरोप लगाया है कि जब वह अपनी ड्यूटी रोस्टर के संबंध में मुख्य सुरक्षा अधिकारी से मिलने गई तो उन्होंने उसका यौन उत्पीड़न किया और जातिवादी टिप्पणी की. संपर्क करने पर एम्स के अधिकारियों ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
गौरतलब है कि कोलकाता में लेडी डॉक्टर से रेप के बाद हत्या के मामले को लेकर पिछले दिनों AIIMS के डॉक्टरों ने भी प्रदर्शन किया था. डॉक्टर के समर्थन में FORDA, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) सहित अन्य रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्ट्राइक किया था. डॉक्टरों की मांग थी कि चिकित्सा कर्मियों पर हमलों को रोकने के लिए केंद्रीय कानून लागू हो.
कब चर्चा में आया आरजी कर अस्पताल?
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल अस्पताल के सेमिनार हॉल से 9 अगस्त को 31 साल की ट्रेनी महिला डॉक्टर का शव मिला था. उसके शरीर से कपड़े गायब थे. खून बह रहा था. शरीर पर चोटों के निशान थे. इस घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स में नाराजगी बढ़ गई थी और वे हड़ताल पर चले गए थे. मामले में पुलिस ने आरोपी संजय रॉय को गिरफ्तार किया.
सेमिनार हॉल चली गई थी लेडी डॉक्टर
बता दें कि ट्रेनी डॉक्टर की उम्र 31 साल थी, जो उस दिन तीन और डॉक्टर्स के साथ नाइट ड्यूटी पर थी. इनमें दो डॉक्टर चेस्ट मेडिसिन डिपार्टमेंट थे, एक ट्रेनी थी. एक कर्मचारी अस्पताल के हाउस स्टाफ से था. उस रात को इन सभी डॉक्टर्स और कर्मचारियों ने साथ में खाना खाया था. इसके बाद महिला डॉक्टर रात को करीब दो बजे सोने के लिए अस्पताल के सेमिनार हॉल में चली गई थी.