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LG के लिए 'रिक्वेस्ट मोड' में आई केजरीवाल सरकार

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली में एलजी को ही प्रशासक माना था और सरकारी कामकाज में उनकी मंजूरी को जरूरी बताया था.

उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी ने भले ही आक्रामक प्रतिक्रिया दी हो और आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही. लेकिन सरकारी कामकाज में उसके तेवर ढीले नजर आ रहे हैं और अब केजरीवाल सरकार रिक्वेस्ट मोड में आ गई है.

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली में एलजी को ही प्रशासक माना था और सरकारी कामकाज में उनकी मंजूरी को जरूरी बताया था. लेकिन आदेश के बाद पहले तो आप ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी और बाद में केजरीवाल के सहयोगियों ने दिल्लीवालों को समस्याएं लेकर एलजी के पास जाने की सलाह दी. लेकिन लगता है अब सरकार चलाने की मजबूरी ने 'आप' के नेताओं को भी सुर बदलने पर मजबूर कर दिया है.

मंत्रियों के पास नहीं आएंगी ट्रासंफर-पोस्टिंग की फाइलें
शुक्रवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि एलजी ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद एक आर्डर निकाला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि दिल्ली में आईएएस और दानिक्स अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग और सर्विसेज विभाग से जुड़े सारे मामले उनके अधीन होंगे. सिसोदिया के मुताबिक, अब किसी भी ट्रांसफर-पोस्टिंग की फाइल उनके मंत्रियों के पास नहीं आएंगी.

उपराज्यपाल से मिले सिसोदिया
इसी सिलसिले में मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को एलजी से भी मुलाकात की. सिसोदिया के मुताबिक, उन्होंने एलजी से निवेदन किया है कि बेशक वो ट्रांसफर-पोस्टिंग अपने हिसाब से करें. लेकिन उनके दो अफसरो की नियुक्ति वो नहीं छेंड़ें. सिसोदिया ने बताया कि उन्होंने एलजी से आग्रह किया है कि पीडब्ल्यूडी सेक्रेटरी और हेल्थ सेक्रेटरी को न हटाया जाए, क्योंकि ये दोनों अफसर शिक्षा और स्वास्थ्य के काम को बहुत बेहतर ढंग से कर रहे हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने परंपरागत तरीके से आईएएस की नियुक्ति वाली जगह पर दूसरी सर्विसेज के अफसरों की नियुक्ति की है. पीडब्लूडी सेक्रेटरी एक इंजीनियरिंग सर्विस के अफसर को बनाया गया है, जबकि हेल्थ डिपार्टमेंट में एक डॉक्टर को सेक्रेटरी बनाया गया है. सिसोदिया ने दावा किया कि पीडब्लूडी को एक इंजीनियर बहुत बेहतर ढंग से चला सकता है और स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टर ही ढंग से समझ सकता है.

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