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छपरा: बारिश से 'टापू' बना RT-PCR जांच केंद्र, मरीजों को गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर

बारिश की वजह से छपरा स्थित सदर अस्पताल का हाल बुरा है. वहां आसपास पानी भर गया है. मरीजों, डॉक्टर्स को आने-जाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

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छपरा के सदर अस्पताल के बाहर भरा पानी
छपरा के सदर अस्पताल के बाहर भरा पानी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • छपरा में बना RT-PCR जांच केंद्र चारों तरफ पानी से घिरा
  • छपरा सदर अस्पताल में है यह RT-PCR लैब
  • स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने 18 जून को किया था इसका उद्घाटन

बिहार में हुई बारिश ने फिर एक बार वहां प्रशासन के काम की पोल खोल दी है. छपरा में एक अस्पताल में अभी 18 जून को ही कोरोना जांच के लिए RTPCR लैब का उद्घाटन हुआ था. लेकिन बारिश में उसके आसपास पानी भर गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल परिसर में जलजमाव के कारण मरीजों को गोद मे उठाकर इलाज करवाने के लिए ले जाना पड़ रहा है. जलभराव से RTPCR लैब भी मानों टापू बन गई है, जहां आने-जाने वालों को परेशानी हो रही है. 

दरअसल, छपरा में लगातार हुई बारिश से पूरे शहर में कई जगह जलभराव हो गया था. बाकी जगहों से तो पानी धीरे-धीरे करके निकल गया लेकिन कमिश्नरी मुख्यालय में स्थित सदर अस्पताल के परिसर में जलजमाव की स्थिति अभी भी बरकरार है. यहां आने वाले मरीज, उनके तीमारदार और चिकित्सक परेशान हैं.

छपरा के सदर अस्पताल के बाहर भरा पानी
छपरा के सदर अस्पताल के बाहर भरा पानी

पानी में जंगली जानवर भी घूम रहे

इसी RTPCR लैब के बगल में ही डायलिसिस केंद्र भी है, जहां वैसे मरीज आते है, जिनका इम्यून सिस्टम पहले ही कमजोर होता है, जिनको हाइजीन और साफ वातावरण की बहुत जरूरत होती है. लेकिन यहां हाल ऐसे हैं कि इसी पानी मे सुअर भी घूमते देखे गए हैं.

सदर अस्पताल परिसर में जानवर घूम रहे हैं

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने 18 जून को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए इसका उद्घाटन किया था. इस लैब की वजह से कोविड जांच के सैंपलों की जांच रिपोर्ट जिले में ही 24 घंटे में मिल जाएगी, जिसको पहले पटना भेजना पड़ता था. रिपोर्ट आने में कभी कभी 15 दिन का भी समय लग जाता था.

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