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देशभक्ति की भावना से लवरेज एक किसान ने सेना के जवानों के लिए किया अंगदान

पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादियों को उसके घर में घुसकर मार गिराने की वजह से इन दिनों देश में हर तरफ भारतीय सेना के जयकारा के नारा लग रहे हैं.

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किसान ने किया ऐलान
किसान ने किया ऐलान

पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादियों को उसके घर में घुसकर मार गिराने की वजह से इन दिनों देश में हर तरफ भारतीय सेना के जयकारा के नारा लग रहे हैं. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से देशवासियों के मन में भारतीय सेना के प्रति सहानुभूति का मानो ज्वाला फूट पड़ी है. अलग-अलग दलों के राजनेता भले ही इस घटना को लेकर तरह-तरह की बयानबाजी कर अपनी सियासत चमकाने में लगे हों लेकिन आम नागरिकों इससे इतर भारतीय सेना के पराक्रम पर गर्व है. इससे बिहार भी अछूता नहीं है.

यही वजह है कि भारतीय सेना के वीरता एवं जज्बे को सलाम करते हुए एवं उनके हौसला अफजाई के लिए सीतामढ़ी के एक किसान ने सेना के जवानों के लिए अपनी एक किडनी और एक आंख दान करने का ऐलान किया है.

देशभक्ति की भावना से लवरेज सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर के उवैना गांव के एक किसान श्याम सुंदर सिंह ने सेना के जवानों के लिए अपने शरीर का अंग दान करने की घोषणा आजतक के सामने की. श्याम सिंह ने अभी तो अपनी एक किडनी और एक आंख दान में दिया है लेकिन उन्होंने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो देश की आन-बान और शान के लिए पूरा शरीर दान में दे देगा.

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भारतीय सेना के वीरता, उसके पराक्रम पर गर्व करते हुए साधारण किसान श्याम सुंदर सिंह ने यह फैसला लिया है. उसे इस बात का फक्र है कि देश के जवानों ने आतंकवादियों को उसके घर में घुसकर मारा है. श्याम सुंदर सिंह ने कहा कि आए दिन सिर्फ यही सुनने को मिलता था कि आतंकवादियों ने हमारे सेना को मार गिराया. लेकिन बहुत अरसे बाद ये सुनने को मिला कि हमारी सेना ने आतंकवादियों को उसके घर में जाकर न केवल मार गिराया बल्कि उसके ठिकानों को भी नेस्तानाबुद कर दिया. यह सुनकर उसका सीना चौड़ा हो गया.

उन्होंने रुंआंसे मन से कहा कि वो भले ही खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता हो लेकिन जरुरत पड़ने पर वो देश के लिए अपना पूरा शरीर न्योछावर कर देगा. श्याम सुंदर सिंह के इस फैसले पर उसकी पत्नी को भी कोई एतराज नहीं बल्कि गर्व है. श्याम सुंदर सिंह के जवानों के लिए अंगदान की घोषणा से उसके गांव वाले भी खुश हैं और सबों का यह मानना है कि देश के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए.

इतना ही नहीं सीतामढ़ी समाहरणालय में कार्यरत लिपिक अजीत कुमार सिंह ने अपने एक महीने का वेतन सेना राहत कोष में दान के रुप में दिया. आपूर्ति विभाग में कार्यरत अजीत कुमार सिंह ने इस आशय का पत्र और चेक सीतामढ़ी के जिलाधिकारी को सुपुर्द किया.

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