
बिहार के दरभंगा के बहादुरपुर के गनौली में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र बिहार सरकार की नाकामी का जीता जागता उदाहरण पेश कर रहा है. बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था किस तरीके से धराशाई हो गई है उसकी तस्वीर देखनी हो तो कोई इस स्वास्थ्य केंद्र की ओर कदम बढ़ा सकता है.
आजतक की टीम सोमवार को दरभंगा के गनौली गांव में पहुंची और वहां पर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की जो तस्वीर सामने आई, उसे देखकर किसी का भी माथा चकरा सकता है.
गांव वालों ने बताया कि लॉकडाउन के कारण स्वास्थ्य केंद्र फिलहाल बंद है और कोई भी डॉक्टर या नर्स यहां पर नहीं आती है, मगर आगे बातचीत के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र की पूरी हकीकत सामने रख दी.
दरअसल, यह स्वास्थ्य केंद्र देखने में पूरी तरीके से खंडहर सा नजर आता है. ग्रामीणों ने बताया कि 90 के दशक में आरजेडी शासनकाल में इस स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत की गई थी, मगर उसके बाद से ही इसकी हर तरीके से अनदेखी हुई है.
आजतक ने जब इस स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया तो पाया कि इस खंडहरनुमा इमारत में ना तो कोई डॉक्टर था, ना ही नर्स. ग्रामीणों से जब और जानकारी प्राप्त की गई तो पता चला कि गांव के लोग इस स्वास्थ्य केंद्र का इस्तेमाल मवेशी और उसका चारा रखने के लिए करते हैं.

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बात यहीं पर समाप्त नहीं होती है, खाली पड़े इस इस लंबे चौड़े उप स्वास्थ्य केंद्र का इस्तेमाल गांव वालों ने अब गोबर का गोइठा सुखाने के लिए करना शुरू कर दिया है.
ग्रामीणों ने बताया कि इस स्वास्थ्य केंद्र पर लॉकडाउन से पहले हफ्ते में एक दिन केवल डॉक्टर एक या 2 घंटे के लिए आता है और फिर पूरे सप्ताह के लिए नदारद हो जाता है. बिहार का यह स्वास्थ्य केंद्र जिस तरीके से अपनी बदहाली की कहानी बता रहा है वह न केवल सरकार के लिए बल्कि किसी के लिए भी शर्मनाक है.