
रक्षाबंधन पर बहनों को पैसे देने का रिवाज सालों से चला आ रहा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को देखकर ऐसा लगता है कि अब इस रिवाज ने एक नया रूप ले लिया है. वीडियो में एक लड़की ने हाथों में एक अनोखे डिजाइन वाली मेहंदी लगा रखी है, जिसमें क्यूआर कोड बना हुआ है. लड़की का भाई जब अपने फोन से इसे स्कैन करता है, तो स्क्रीन पर पेटीएम खुल जाता है.
कई लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए ऐसा कह रहे हैं कि पेटीएम और गूगल पे के जमाने में अब लोग मेहंदी के क्यूआर कोड को भी स्कैन करके पेमेंट कर सकते हैं.
फेसबुक पर ये वीडियो शेयर करते हुए एक शख्स ने लिखा, “क्यूआर कोड वाली अनोखी मेहंदी डिज़ाइन राखी त्योहार के लिए जटिल रूप से तैयार की गई है, यह डिजाइन भाई-बहनों के बीच उपहारों के पारंपरिक आदान-प्रदान को एक डिजिटल मोड प्रदान करता है.”

आजतक ने इस वीडियो को बनाने वाले कलाकार यश से बात की, जिन्होंने हमें बताया कि ये दो अलग-अलग वीडियो को जोड़कर बनाया गया है. लेकिन, क्या मेहंदी से बनाए गए क्यूआर कोड काम करते हैं? जानिए एक्सपर्ट्स ने हमें क्या बताया.
मेहंदी नहीं, वीडियो एडिटिंग का है कमाल
वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें “yash_mehndi” नाम का इंस्टाग्राम अकाउंट मिला. उन्होंने इस वीडियो को 28 अगस्त को शेयर किया था. इस पोस्ट में लिखा है कि ये वीडियो एडिटेड है.
ये अकाउंट दिल्ली के रहने वाले यश का है, जिन्हें मेहंदी कलाकारी का शौक है. यश ने आजतक से बातचीत में बताया कि वायरल वीडियो उन्होंने ही शूट और एडिट किया था.
उन्होंने कहा “रक्षाबंधन के त्योहार से कुछ दिन पहले मैंने कुछ ट्रेंडिंग वीडियो देखे थे. इनमें बहनें को अपने भाइयों के लिए पूजा की थाली और राखी के साथ एक क्यूआर कोड लाते हुए दिखाया गया था. यहां से ही मुझे क्यूआर कोड वाली मेहंदी का आइडिया आया. वायरल वीडियो में दिख रही मेहंदी मैंने अपनी बहन के हाथ पर बनाई थी.”
यश ने हमें बताया कि रील बनाने के लिए उन्होंने दो स्क्रीन रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया है. पहले, उन्होंने पेटीएम से मेहंदी में बने क्यूआर कोड को स्कैन किया. दूसरे वीडियो में, उन्होंने असल में काम कर रहे एक क्यूआर कोड को स्कैन किया. इसके बाद उन्होंने दोनों वीडियो को इस तरह से जोड़ दिया, जिससे लगे कि मेहंदी वाला क्यूआर कोड ही स्कैन हो रहा है.
वायरल वीडियो में फोन की स्क्रीन पर दिख रहे ऑप्शन को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इसे फोन की गैलरी से चलाया जा रहा है. ये ऑप्शन पेटीएम में नहीं होते हैं. यश ने हमें वायरल वीडियो बनाने में इस्तेमाल हुए असली वीडियो भी भेजे, जिन्हें नीचे देखा जा सकता है.
इसके अलावा, यश ने बताया कि मेहंदी बनाते समय उन्होंने इंटरनेट पर मौजूद एक क्यूआर कोड को देखकर उससे मिलता-जुलता डिजाइन बना दिया था. इससे साफ होता है कि वीडियो में दिख रहा क्यूआर कोड असल में काम नहीं करता है.
क्या मेहंदी से काम करने वाला क्यूआर कोड बनाया जा सकता है?
हमने साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) में इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप के प्रमुख प्रभु राम से इस बारे में बात की. उन्होंने बताया कि क्यूआर कोड काली बिंदुओं की मदद से बनाया गया एक आसान-सा दिखने वाला डिजाइन तो है, लेकिन इसमें काफी जानकारी मौजूद होती है. इसमें दिखने वाली हर काली बिंदी में कुछ डेटा छिपा होता है. जब स्कैनर इन सारी बिंदुओं को पढ़ लेता है? तभी पेमेंट हो सकती है.
प्रभु राम ने कहा, “अगर त्वचा पर बनाए गए क्यूआर कोड की बात करें, तो कोड के आकार, उसकी मोटाई, स्किन और क्यूआर कोड के रंग, आदि पर निर्भर करता है कि वो काम करेगा या नहीं. अगर क्यूआर कोड को किसी अनुभवी आर्टिस्ट से टैटू करवा लिया जाए, तो वो काम कर सकता है. लेकिन, कितने समय तक काम करेगा, ये कहा नहीं जा सकता.”
काली स्याही से किसी व्यक्ति के हाथ पर गुदवाए गए एक असली क्यूआर कोड की तस्वीर नीचे देखी जा सकती है. आप अपने फोन से इसे स्कैन कर सकते हैं.
इसके अलावा, साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ सनी नेहरा ने बताया कि क्यूआर कोड स्कैनर काले और सफेद रंग पर सबसे अच्छे से काम करता है. त्वचा के रंग पर बने कोड को समझने में इसे मुश्किल हो सकती है. लेकिन, अगर काली स्याही से शरीर के किसी सपाट हिस्से पर क्यूआर कोड को टैटू कराया जाए तो ये काम कर सकता है.“