scorecardresearch
 

फैक्ट चेक: क्या बिहार में लीची खाने से हो रही हैं मौतें?

बिहार का मुजफ्फरपुर लीची बागानों के लिए मशहूर है. इस सीजन में यह इलाका लीची के फलों से लहलहा उठता है. इसके अलावा इसी सीजन में 1995 से हर साल इन इलाकों में इन्सेफेलाइटिस से मौतें भी सामने आ रही हैं.

लीची खाने से हो रही हैं मौतें (फाइल फोटो) लीची खाने से हो रही हैं मौतें (फाइल फोटो)

पिछले कुछ दिनों के भीतर बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में 100 से ज्यादा बच्चों की मौतें हुईं. सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, 'इन मौतों की वजह एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) या जापानी इन्सेफेलाइटिस (JE) है.

मीडिया में छपी कई खबरों में इन मौतों को लीची से जोड़ा गया है. इस मौसमी फल को लेकर लोगों में पहले से ही काफी डर बना हुआ है. फेसबुक और व्हाट्सएप पर लोग मैसेज और वीडियो फॉरवर्ड कर रहे हैं, जिसमें बच्चों से लीची नहीं खाने को कहा जा रहा है. इन मैसेजेज में दावा किया जा रहा है कि लीची खाने से बच्चों में जानलेवा बुखार फैल सकता है जो कि लाइलाज है.

फेसबुक पर '​Live india 24x7' की एक पोस्ट वायरल हुई जिसमें कहा गया, 'आप सभी को सूचित किया जाता है कि फिलहाल लीची खाने से परहेज करें, अपने बच्चों को कदाचित लीची ना दें वरना चमकी बुखार से ग्रसित हो सकते हैं, फिलहाल अभी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लाइलाज बीमारी घोषित कर दिया है. इसलिए जब तक इस वायरस का पूर्णतः रोकथाम नहीं हो जाता तब तक लीची के सेवन से दूर रहें.'

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि यह दावा भ्रामक है. डॉक्टरों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन मौतों के पीछे कई कारक हैं. न तो सरकार की तरफ से लीची खाने को लेकर कोई एडवाइजरी जारी हुई है, न ही किसी विश्वसनीय संस्था ने लीची खाने को खतरनाक बताया है.

वायरल पोस्ट के साथ एक वीडियो लगाया गया है जिसमें लीची के अंदर एक कीड़ा दिखाया गया है. वीडियो में दावा किया जा रहा है कि सभी लोग ध्यान से देखिए, इस लीची में कितना बड़ा कीड़ा है. हम जो लीची खाते हैं, बाहर से साफ, लाल, मीठी दिखाई देती है, लेकिन मैंने छीलने के बाद ध्यान से देखा तो इतना बड़ा कीड़ा है. ध्यान से देखिए इसको, यही हमारे बच्चों के पेट में जाएगा. आप सभी से अपील है कि लीची खाने से पहले सौ बार सोचिएगा.'

स्टोरी लिखे जाने तक यह पोस्ट 900 से ज्यादा शेयर हो चुकी है. पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

एक और फेसबुक यूजर 'घरेलु रामबाण नुस्खे Health Tips ' और 'Ayurveda info ' ने भी इसी पोस्ट को शेयर किया है.

निशाने पर लीची क्यों?

मुजफ्फरपुर लीची बागानों के लिए मशहूर है. इस सीजन में यह इलाका लीची के फलों से लहलहा उठता है. इसके अलावा इसी सीजन में 1995 से हर साल इन इलाकों में इन्सेफेलाइटिस से मौतें भी सामने आ रही हैं.

इस साल इन्सेफेलाइटिस से बच्चों की मौतें शुरू होने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट में इन मौतों को लीची से जोड़ा गया.

मीडिया ने अमेरिका और भारत के वैज्ञानिकों के संयुक्त अध्ययन का भी हवाला दिया, जो कि मेडिकल जर्नल 'द लैंसेंट ' में 2017 में छपा है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 'मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफलोपैथी का प्रकोप हाइपोग्लाइसिन ए (hypoglycin A) और एमसीपीजी टॉ​क्सीसिटी (MCPG toxicity) दोनों से जुड़ा है. ये दोनों ही तत्व लीची में प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं, क्योंकि ये दोनों तत्व रात में ब्लड शुगर लेवल बढ़ाते हैं, इसलिए रिपोर्ट कहती है कि रात के खाने में लीची का इस्तेमाल कम करें ताकि ग्लूकोज का स्तर तेजी से न बढ़े जो इस संदिग्ध बीमारी का कारक है.

दूसरी स्टडी इसके उलट

एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) पर बांग्लादेश और अमेरिका का एक दूसरा संयुक्त अध्ययन 2017 में ही 'द अमेरिकन जर्नल आफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाईजीन' ASTMH में छपा है. यह 'द लैंसेंट' के अध्ययन से उलट है. इसमें कहा गया है कि लीची नहीं, बल्कि एक प्रतिबंधित पेस्टीसाइड है जो मौतों का कारण बन रहा है.  

स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में मुजफ्फरपुर में हुई मौतों के बाद एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम/जापानी बुखार को लेकर तीन प्रेस रिलीज जारी की है.

18 जून, 2019 को मंत्रालय की प्रेस रिलीज में कहा गया कि जिन घरों में ये मौतें हुईं, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति, उनके पोषण और भीषण गर्मी आदि पर चर्चा की गई. जिन बच्चों की मौतें हुई हैं उनमें हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड में शुगर की कमी) का हाई लेवल पाया गया.

मंत्रालय की किसी भी प्रेस रिलीज या प्रेस कॉन्फ्रेंस में लीची खाने को लेकर कोई एडवाइजरी नहीं जारी की गई.

लीची के बारे में क्या कहते हैं डॉक्टर?

मीडिया में छपी एक रिपोर्ट  में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) के विभाग प्रमुख डॉ. गोपाल शंकर ने भी 'द लैंसेंट' की लीची थ्योरी को खारिज किया है. यह वही अस्पताल है जहां इस बार सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं.

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. के के अग्रवाल का कहना है कि 'कुपोषण' की अवस्था में खाली पेट लीची खाना और शाम का खाना न खाना मौत का एक कारण हो सकता है. उनके मुताबिक, 'लीची में ऐसे केमिकल होते हैं जो खाली पेट लीची खाने और शाम का खाना न खाने की स्थिति में अगली सुबह खून में ग्लूकोज का स्तर प्रभावित करते हैं.'

मशहूर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव बगाई इस बात को पूरी तरह खारिज करते हैं कि लीची खाने से मौत हो सकती है. वे कहते हैं, 'लीची खाना किसी भी तरह से नुकसानदेह नहीं है. इन मौतों को लीची खाने से जोड़ कर प्रकाशित हो रही खबरें गुमराह करने वाली हैं.'

वायरल वीडियो में जो कीड़ा दिखाया जा रहा है वह किसी भी फल में हो सकता है. किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए ऐसे फलों को खाने से बचना चाहिए जिनमें कीड़े पड़ गए हों. हालांक, डॉक्टरों का कहना है कि इसका इन्सेफेलाइटिस और जापानी बुखार से कोई लेना देना नहीं है.

फिलहाल, डॉक्टर और रिसर्चर इस बात की खोज में लगे हैं कि मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में इन्सेफेलाइटिस और जापानी बुखार के पीछे क्या कारण हो सकते हैं. यह अभी खोजा जाना बाकी है कि इस बीमारी का लीची से कोई संबंध है या नहीं, इसलिए सोशल मीडिया पर लोगों को लीची न खाने के लिए जागरूक करने का प्रयास पूरी तरह भ्रामक है.

फैक्ट चेक

कई फेसबुक यूजर जैसे 'Live india 24x7' और 'Ayurveda info'

दावा

लीची खाने से जानलेवा बुखार हो सकता है और आपकी जान जा सकती है, इसलिए लीची न खाएं.

निष्कर्ष

बिहार में इन्सेफेलाइटिस या जापानी बुखार से हुई मौतों के पीछे कई कारक हैं जिसके बारे में अभी डॉक्टर्स खुद दावे से कुछ नहीं कह सकते. लेकिन अभी तक किसी ने भी यह सलाह नहीं दी है कि लीची खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
कई फेसबुक यूजर जैसे 'Live india 24x7' और 'Ayurveda info'
क्या आपको लगता है कोई मैसैज झूठा ?
सच जानने के लिए उसे हमारे नंबर 73 7000 7000 पर भेजें.
आप हमें factcheck@intoday.com पर ईमेल भी कर सकते हैं
आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें