ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी सरकार की मुखर आलोचना के लिए जाने जाते हैं. लेकिन क्या हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने कहा है कि "कोरोना वायरस जैसी कोई चीज वजूद में नहीं है, सरकार लोगों को मूर्ख बना रही है?"
सोशल मीडिया पर ओवैसी की एक तस्वीर के साथ यह दावा किया जा रहा है, जिसमें वे कोरोना का टेस्ट करवाते हुए दिख रहे हैं. इस तस्वीर के साथ हिंदी में दावा किया जा रहा है, “ये वही है ना जो कह रहा था कोरोना जैसा कुछ नही है सरकार मूर्ख बना रही है...”

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा गलत है. हमें ओवैसी का ऐसा कोई बयान नहीं मिला, जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस के वजूद को नकारा हो.
फेसबुक के साथ साथ ये पोस्ट ट्विटर वायरल पोस्ट के साथ यह भी जोड़ रहे हैं कि “औवैसी सभी मुस्लिमों से जांच ना कराने के लिए बोल कर उन्हें गुमराह कर रहे हैं, और खुद की जांच खोपचे में करवा रहे हैं.” कुछ यूजर्स ने ये पोस्ट शेयर की, लेकिन बाद में डिलीट भी कर दी. इसका आर्काइव वर्जन यहां देखा जा सकता है.
AFWA की पड़ताल
कीवर्ड्स सर्च की मदद से हमें कोरोना वायरस से जुड़े ओवैसी के बयान पर आधारित कुछ न्यूज रिपोर्ट मिलीं. हमें ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस के वजूद को नकारा हो या लोगों से टेस्ट न कराने की बात की हो. इसके उलट, हमें ऐसे कई आर्टिकल मिले, जिसमें महामारी से लड़ाई में ओवैसी के योगदान का जिक्र किया गया है.
अप्रैल में ओवैसी ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में 178 पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विप्मेंट (PPE) किट और 2,640 मिनी किट वितरित की थी. इसी महीने में ओवैसी ने कहा था कि जिस इंसान का इंतकाल महामारी की वजह से होता है, इस्लाम में उसका दर्जा शहीद का होता है. शहीद होने वाले को गुस्ल (cleansing) और कफन (shroud) की जरूरत नहीं होती और उन्हें जल्द से जल्द दफन किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि जनाजे में कम से कम लोग जाएं ताकि संक्रमण की संभावना कम रहे.
Jis insaan ka inteqaal waba ki wajah se hota hai, Islam mein uska darja shaheed ka hota hai. Shuhadah ko ghusl aur kafan ki zaroorat nahi hoti aur unhein jald se jald dafan kiya jaana chahiye https://t.co/lmQJxf30cZ
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) April 2, 2020
उन्होंने मुसलमानों से यह भी अपील की थी कि वे घर पर रह कर ही नमाज अदा करें. इसके अलावा ओवैसी ने तेलंगाना सरकार से टेस्ट की संख्या बढ़ाने की भी अपील की थी.
हाल ही में उन्होंने हैदराबाद के चार मीनार इलाके में स्थित निजामिया तिब्बी अस्पताल में अपनी कोरोना जांच भी करवाई थी. 11 जुलाई को उन्होंने इसके बारे में ट्वीट करते हुए उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि संकोच न करें और जांच कराएं. उनकी जांच के दौरान की जो तस्वीर वायरल हो रही है, उसे “Deccan Chronicle ” के 12 जुलाई के संस्करण में देखा जा सकता है.
Got my antigen & RTPCR tests done for COVID-19 today. My antigen test results were negative, Alhamdulilah. There are 30 odd centres in the South of Hyderabad where antigen testing is being conducted, I encourage all of you to not hesitate & get tested! pic.twitter.com/lihGjG7upx
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) July 11, 2020
मोदी सरकार की आलोचना
हालांकि, यह सही है कि असदुद्दीन ओवैसी महामारी से निपटने के लिए सरकार की व्यवस्था को लेकर समय-समय पर आलोचना करते रहते हैं.
उन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन मर्कज की घटना का भी बचाव किया था, जिसमें शामिल लोगों में से बड़ी संख्या में कोरोनो पॉजिटिव पाए गए थे. उस समय उन्होंने कहा था, “जिस दिन यह कार्यक्रम शुरू हुआ, उस दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि कोरोना वायरस हेल्थ इमर्जेंसी का मसला नहीं है.”
वायरल पोस्ट को लेकर AFWA ने ओवैसी से संपर्क किया. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा बयान कभी नहीं दिया. इसके उलट, मैं कोविड-19 बीमारी के बारे में लगातार जागरूकता लाने का प्रयास कर रहा हूं. हाल ही में मैंने अपना कोविड-19 टेस्ट एक सरकारी टेस्ट सेंटर में करवाया ताकि इस वायरस और जांच को लेकर लोगों का डर दूर हो. मैंने अपने 45 नगर निगम पार्षदों को लक्ष्य दिया है कि प्रत्येक वार्ड में 500 परीक्षण किए जाने चाहिए.”
पड़ताल से साफ है कि वायरल पोस्ट में किया गया दावा गलत है. महामारी से निपटने में सरकार की भूमिका को लेकर ओवैसी भले ही आलोचना का रुख अपना रहे हों, लेकिन उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा कि कोरोना वायरस का कोई वजूद नहीं है.