
एक लड़की को पेड़ से लटकाकर बेरहमी से पीटते, उसकी चीखों को अनसुना करते और उसकी बेबसी पर हंसते कुछ पुरुषों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. कुछ लोग इसे बंगाल की घटना बताते हुए कह रहे हैं कि इस लड़की को पीटने वाले टीएमसी कार्यकर्ता थे. साथ ही ये भी दावा कर रहे हैं कि लड़की को इसलिए पीटा गया क्योंकि वो दलित है और उसका भाई भाजपा कार्यकर्ता है.
एक फेसबुक यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “अभी बंगाल का हाल देखकर भी आंखें नहीं खुल रही तुम्हारी, ममता के दलालों! टीएमसी वालो कुते की मौत मरोगे तुम हरामियों. इस बेटी का बस इतना कसूर है कि ये एक दलित है और इसका भाई भाजपा का कार्यकर्ता है.”

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि न तो वायरल वीडियो वाली घटना बंगाल की है, न ही पिट रही लड़की दलित है और न ही उसका कोई भाई भाजपा कार्यकर्ता है. ये घटना मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले की है और इसमें जिस लड़की को पीटा जा रहा है, वो आदिवासी समुदाय की है. उसका कोई भाई भाजपा कार्यकर्ता नहीं है.
वॉट्सएप और ट्विटर पर भी कई लोग इस वीडियो को लोग बंगाल का बता रहे हैं.
क्या है सच्चाई?
छानबीन के दौरान हमें एक ट्विटर पोस्ट मिली जिसमें वायरल वीडियो पोस्ट किया गया था. इस वीडियो के नीचे कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा था, “इन लोगों का हिसाब MP पुलिस कर चुकी है.” इससे हमें अंदाजा लगा कि इस घटना का ताल्लुक मध्य प्रदेश से हो सकता है.

कीवर्ड सर्च के जरिये तलाशने पर हमें ये वीडियो ‘द हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक वीडियो रिपोर्ट में मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना 28 जून 2021 को अलीराजपुर, मध्य प्रदेश में घटी थी. लड़की के पिता और उसके चचेरे भाइयों ने उसे इसलिए पीटा था क्योंकि वो अपने ससुराल से बिना किसी को बताए अपने मामा के घर चली गई थी.
तकरीबन सभी प्रमुख मीडिया वेबसाइट्स ने इस दिल दहला देने वाली घटना से संबंधित खबर छापी थी. इस मामले के चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था.
पीड़िता न दलित है, न उसका भाई भाजपा कार्यकर्ता
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद ‘आजतक’ के अलीराजपुर संवाददाता चंद्रभान सिंह भदौरिया पीड़ित लड़की के परिजनों से मिले थे. परिजनों से हुई बातचीत के आधार पर उन्होंने बताया, “पीड़ित लड़की आदिवासी है, न कि दलित. उसकी चार बहनें और एक सात साल का छोटा भाई है. लड़की का कोई भाई भाजपा कार्यकर्ता नहीं है. उसके चचेरे भाई खेती-मजदूरी करते हैं.”
हालांकि, ये बात सच है कि बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की घटनाएं हुई थीं जिनमें कई लोगों की जान भी गई थी.
लेकिन इतनी बात स्पष्ट है कि वायरल हो रहा वीडियो मध्य प्रदेश का है और इसका बंगाल से कोई लेना-देना नहीं है.
(सोनाली खट्टा के इनपुट के साथ)