आज एक इंसान नहीं एक कौम का जन्मदिन है. आज से 48 साल पहले इस धरती पर खिले थे एक दिव्य पुरुष संजय कपूर. क्या कहा, कौन संजय कपूर...अरे अपने अनिल कपूर के मुंछमुंडे वर्जन. अच्छा अब आप सोच रहे होंगे हम इन जनाब की बात क्यों कर रहे हैं जिनकी बॉलीवुड में पैदाइश भी किसी को याद नहीं. दरअसल यहीं आप गलती कर रहे हैं. संजय कपूर को फुटेज ना देकर हमने एक महान पंरपरा के ध्वजवाहक के साथ अन्याय किया है.
संजय कपूर बॉलीवुड में भाईचारे के सबसे बड़े पोस्टर ब्वॉय हैं. भाईचारा माने भाई के साथ चारे (खर्चा-पानी) का पवित्र रिश्ता रखना. अपने उदय बाबा, सोहेल मियां, अरबाज भाई और भी जाने कितने इस गिनती में आते हैं. इन तमाम लोगों की वजह से भारत में परिवार की संस्था जिंदा है. भाइयों में मोहब्बत जिंदा है. बाहर के देशों में जहां बालिग होने पर मां-बाप बच्चों को घर से निकाल देते हैं कि बेटा जाओ, अब खुद कमाओ. हम न पालेंगे तुम्हें. वहीं अपने देश में बड़ा भाई छोटे भाई को ताउम्र पालता है. सलमान भाई अपने दो छोटे मुस्टंडे भाइयों को पाल-पोस रहे हैं. एकता कपूर, तुषार बाबा को पाल रही हैं. उदय बाबा को रानी मुखर्जी के पूज्य पति आदित्य पाल रहे हैं.
उम्र भर भाई से खर्चा उगाहने के लिए बड़े समर्पण की जरूरत है. आपको पूरी शिद्दत से कुछ नहीं करने का हुनर साधना पड़ता है. और दर्जनों क्यूट गलतियों से गुजरना पड़ता है. यकीन न हो तो आंखें खोलकर उदय चोपड़ा की क्यूट मुस्कान और वह ऐलान याद करिए. एक्टिंग क्विट्स मी फाइनली. या अल्लाह. कैसी पाकीजगी भरी स्वीकारोक्ति थी वह. आदित्य के तो आंसू से आंख निकल आई बाहर.
खैर, बातें हैं बातों का क्या. अपन तो जरा बर्थडे ब्वॉय के बारे में जान लेते हैं. इनकी त्रासदी पहली फिल्म से ही शुरू होती है. भाई की डेब्यू फिल्म ‘प्रेम’ कुल जमा पांच साल लेट थी. शायद इसीलिए उसमें एक गाना भी पहले ही डाल दिया गया था. 'आती नहीं आती नहीं... सामने है पर नजर आती नहीं.' ये बात और है कि बाद में कुछेक साल ये कब्ज सॉन्ग के तौर पर मशहूर हुआ. और फिल्म, वह तो फ्लॉप होनी थी सो हुई.
संजय के करियर की एकमात्र हिट फिल्म आई तो वह भी बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित के साथ. लेकिन संजय के साथ मजाक यहां भी बदस्तूर जारी रहा. फिल्म का नाम था ‘राजा’ लेकिन क्रेडिट ले गई माधुरी. मसखरों ने तो ये भी कहा फिल्म का नाम रानी रख देते.
खैर, इसके बाद भाई फिल्मों से वैसे ही गायब हुए जैसे गधे के सिर से सींग गायब होते होंगे. ये होंगे, इसलिए क्योंकि हमने गधे के सींग अभी तक देखे नहीं. तो उनका गायब होना कैसे ही देखते. पर मुहावरा है तो निभाना ही होगा. कम बैक किंग जुगल हंसराज की तरह संजय ने भी कई बार कमबैक करने की कोशिश की मगर हर दफा दर्शकों ने 'गो बैक' का फरमान सुना दिया. आखिरी हादसा हुआ था इनकी फिल्म कयामत से. जहां भाईचारे के दो अनमोल नगीने संजय कपूर और अरबाज खान एक साथ थे. कयामत के दिन जो अजाब आएंगे उनसे भी कहीं ज्यादा दर्दनाक थी ये फिल्म. जनहित के वास्ते इस फिल्म को जल्द से जल्द परदे से उतारा गया. तब जाकर मुल्क का लॉ एंड ऑर्डर बचा और जान-माल की रक्षा की जा सकी..
अब भाई ने सोचा सेल्फ रिस्पेक्ट भी तो कोई चीज है. सो सबसे बड़े भाई की शरण में गए और प्रोड्यूसर हो फिल्मों से मुक्ति पाई. इतिहास गवाह है हजारों लोगों ने इस कदम पर निहाल होकर इन्हें मानव सेवा का नोबेल दिए जाने की सिफारिश कर दी.
अंत में इतना ही कि आप एक इंसान नहीं एक पूरी कौम हैं. दुनिया भर में भले परिवार टूटते जा रहे हों लेकिन भारत में भाईवाद बचाने में आपका बहुत बड़ा योगदान है. आज के दिन को भाईचारा दिवस के रूप में मनाएं और भाईलोगों की जानकारी सब तक पहुंचाएं. हालांकि काम कठिन है. क्योंकि इस भाई की जानकारी जुटाने के लिए जब आप विकीपीडिया पर जाते हैं तो कमबख्त मारा कहता है 'दिस पेज हैज सम इश्यू.' अरे बिना इश्यू के भी कोई महान बन सका है.
अंत में एक शेर की लुगदी, आपके नजर...
कोई यूं ही संजय कपूर नहीं होता
कुछ न कुछ तो भसड़ रही होगी.