सत्यजीत रे को भारतीय फिल्म जगत के सबसे दिग्गज निर्देशकों में गिना जाता है. उनकी उपलब्धियां और काम को लेकर उनके जुनून की फिल्म जगत में आज भी मिसालें दी जाती हैं. सत्यजीत के सबसे उत्कृष्ठ कामों में एक काम ये भी है कि उन्होंने सबसे खूबसूरत ढंग से बनारस को अपनी फिल्मों में दिखाया. उनकी फिल्म अप्पू संसार में उन्होंने जिस अंदाज में बनारस को दर्शाया है, लोग उसके आज भी कायल हैं.
शर्मिला टैगोर को बॉलीवुड की महानतम अभिनेत्रियों में गिना जाता है. उन्होंने जितना हिंदी सिनेमा में काम किया उतना ही उन्होंने बंगाली फिल्मों में भी परचम लहराया. शर्मिला टैगोर 70 के दशक की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस थीं. उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2 बार फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था.लेकिन शर्मिला टैगोर को अभिनेत्री बनाने वाला और कोई नहीं बल्कि सत्यजीत रे ही थे.
सत्यजीत रे बॉलीवुड का वह नाम है जिसे फिल्ममेकिंग स्कूल्स में आज भी पढ़ाया जाता है और जिनकी फिल्में देख कर आज के फिल्म निर्देशक फिल्में बनाना सीखते हैं. हम आज आपको बताने जा रहे हैं सत्यजीत रे के करियर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जो आपको शायद ही मालूम हों.
साल 1959 में सत्यजीत रे ने ही शर्मिला टैगोर को लॉन्च किया था. उन्होंने अपनी बंगाली फिल्म अपूर संसार में शर्मिला को पहली बार काम कराया था. सत्यजीत रे भारतीय सिनेमा के एकमात्र ऐसे फिल्मकार हैं जिनकी झोली में पद्मश्री से पद्म विभूषण तक और ऑस्कर अवॉर्ड से लेकर दादासाहेब फाल्के पुरस्कार हैं.
सत्यजीत रे को 32 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से भी उन्हें नवाजा जा चुका है. सत्यजीत बॉलीवुड के बेहद वर्सटाइल निर्देशक थे. उन्हें बॉलीवुड के ऐसे निर्देशक के तौर पर जाना जाता है जो अपनी फिल्मों में किरदारों को कम से कम या जीरो मेकअप दिया करते थे.
सत्यजीत रे को 32 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से भी उन्हें नवाजा जा चुका है. सत्यजीत बॉलीवुड के बेहद वर्सटाइल निर्देशक थे. उन्हें बॉलीवुड के ऐसे निर्देशक के तौर पर जाना जाता है जो अपनी फिल्मों में किरदारों को कम से कम या जीरो मेकअप दिया करते थे.
2 मई 1921 में बंगाल में जन्में सत्यजीत रे फिल्मकार से पहले चित्रकार, कहानीकार, ग्राफिक डिजाइनर होने के साथ फिल्म आलोचक भी थे.
उन्होंने पाथेर पांचाली, अपराजितो, चारुलता और द वर्ल्ड ऑफ और शतरंज के खिलाड़ी जैसी शानदार फिल्में बनाईं.
बांग्ला भाषी होने के चलते उन्होंने अपनी एकमात्र
हिंदी फिल्म शतरंज के खिलाड़ी की असफलता पर कहा था कि अगर उनकी हिन्दी पर
अच्छी पकड़ होती तो वे इसे और भी अच्छा बना सकते थे.
सत्यजीत की प्रोफेशनल लाइफ के
बारे में तो हर कोई जानता है, लेकिन उनकी पर्सनल लाइफ किसी फिल्म की
स्क्रिप्ट से कम नहीं है. इस बारे में सत्यजीत रे की पत्नी विजया ने अपनी
जीवनी 'माणिक एंड आई' में लिखा है.