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मनोरंजन

क्या IPL मनहूस था? जिसने छुआ, जल गया...

क्या IPL मनहूस था? जिसने छुआ, जल गया...
  • 1/11
प्यार करता हूं मैं आईपीएल से. इतनी सारी वजहें हैं इसकी. क्रिकेट इनमें से एक भी नहीं है.

सीमेंटेड सुपर किंग्स
चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक इंडिया में क्रिकेट के भी सबसे आला हुक्मरान हैं. यानी येलो येलो डबल डर्टी की गुंजाइश वाला फैलो. मगर ये फैलो है कि फैलता ही जा रहा है. इस्तीफे की बात कहो, तो कहता है, मैं लॉर्ड, सुबूत लाकर दो. और वो भी ऐसा वैसा दामाद के बयान टाइप नहीं. इंडिया सीमेंट सा फौलादी सुबूत. सुबूत हैं, इस बात के कि क्रिकेट के इस देसी आका के सन इन लॉ ने लॉ की लंका लगाई और बैटिंग बॉलिंग पर बेटिंग कर खूब खरा सोना सा टका जुटाया. इस ढेर में आखिरी चढ़ावे से वो चूक गए, बुरा हो पुलिस का. खबरें हैं कि मयप्पन अपनी टीम के हारने पर जीतते थे. फाइनल में वे खूब जीतते, मगर मुंबई में ऐसे उतरे कि पुलिस ने लंबी जांच में उतार लिया. इन पीले लालों की जमात में श्रीनिवासन के एक और लाडले शामिल हैं. कैप्टन कूल के तमगे वाले धोनी. समय साक्षी है कि जब जब उनकी कप्तानी पर टीम के कमतर प्रदर्शन के चलते संकट आया, चेन्नई के सीमेंटेड शेर ने ही उन्हें बचाया. मगर इस आईपीएल में पुलिस, बुकी और क्रिकेटर कई गंदी चीजों के भी साक्षी रहे. धोनी भले ही दागदार न हों, मगर उनकी छवि तो डर्टी डर्टी हो ही गई है, पीले रंग के चलते. और ये वो दरकन दरकन है, जिसे मुश्किल किसी भी सीमेंट के लिए जुड़ाना लगता है.

क्या IPL मनहूस था? जिसने छुआ, जल गया...
  • 2/11
प्रिटी प्रीती के हारे हुए किंग्स
तो क्या हुआ जो पैरिस में हुआ इश्क बॉक्सऑफिस पर पिट गया. तो क्या हुआ जो उस वक्त की मुहब्बत नेस को येस करते हुए आईपीएल की टीम खरीदने को तैयार हो गई. और इस खेल के लिए सिनेमा से रिटायरमेंट ले लिया. तो क्या हुआ, जो तमाम बदलावों के बावजूद टीम एक बार फिर प्ले ऑफ से पहले ही ऑफ हो गई. डिंपल बरकरार हैं. कोई गड्ढा समझे तो गिर जाए इन्हीं में इश्क की बला से. और आई लव क्रिकेट कहकर इस इनिंग की शुरुआत करने वाली जिंटा ने भी तो अब यू टर्न ले लिया है. सत्तर एमएम के पर्दे पर फिर से चीख उठी हैं, सल्लू के ठुमके देखकर, आई लव बॉलीवुड. और टीम, राजाओं की इस टीम के पहले राजा का नाम था युवराज. खेले, फिर बीमार पड़े. ठीक हुए तो सहारा लिया पुणे का. किंग्स का सॉन्ग गाने के लिए आए संगकारा. नहीं दिला पाए जयकारा तो गिल्ली उड़ने से बचाने और जीत की गिल्ली उड़ाने के लिए आए गिलक्रिस्ट. हर जगह प्रिटी थीं और हर सीजन में कम ज्यादा अंतर से टीम पिटी थी.
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  • 3/11
रॉयली चेलैंज्ड बैंग लुरू
इसके मालिक रात को रसदार बनाने वाली कई शराबें बनाते हैं. मगर इस रात की सुबह नहीं हो रही. नतीजतन रात का कालापन, कारोबार की कालिख ढंक नहीं पा रहा. विजय माल्या कर्जे के पहाड़ पर पड़े हैं. उनकी पहाड़ों, मैदानों को लांघने वाली एयरलाइंस जमीं पर जम चुकी है. और इसके कर्मचारी बस एक ही रट लगाए रहते हैं, पिछली पगार का माल कहां है माल्या. कभी ये साहब भारत के रिचर्ड ब्रैंसन कहाते थे. अब ब्रॉन्ज सी चमक वाले उनके घावों पर गोल्ड से रंग वाली व्हिस्की के फाहे लगते हैं. रॉयली चैलेंज्ड मालिक का दर्द कम करने को. ये दर्द मैदान पर भी मरहम नहीं पाता. बेटा बुद्ध के राजसी बचपन को याद करता हुआ वीआईपी बॉक्स को वीआईपी बनाता था. एक्ट्रेस गर्लफ्रेंड दीपिका के जरिए. मगर कुछ ही बरसों में दीपिका बेंगलुरू बॉय का साथ छोड़ गईं, आजकल चेन्नई एक्सप्रेस पर सवार हैं और बेंचप्रेस कर डोले बनाने वाले सिद्धार्थ कल्ले ही कलाई मोड़ ताली पीटते हैं. पीटते उनके बैट्समैन गेल और कोहली भी हैं, विरोधी गेंदबाजों को, मगर सिड के पापा के धंधे की तरह तमाम चमक और चर्चों के बावजूद ऐन मौके पर उनका भी रायता फैल जाता है.
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  • 4/11
वॉरियर्स थे जिनके सहारे
पिटे से याद आया पब्लिक जी, पिछले दो सीजन में सबसे पिट पिटकर प्वाइंट टेबल की बेस पर बसेरा करने वाली पुणे की टीम बेसहारा हो गई. सहारा का पारा सेबी ने गिराया. चिट फंड के नाम पर जमा पब्लिक के पैसे की उधारी गर्माहट को लौटाने का हुक्म मिला, तो सुब्रत ने बीसीसीआई को उसके पुराने व्रत, वचन याद दिलाए. ज्यादा मैच के वादे का वचन. नहीं तो फीस कम. कम हुई, मगर फीस नहीं, सहारा की टीम की जमानत की रकम. गुस्साए सुब्रत बोले, हम सेबी और श्रीनिवासन दोनों से निपट लेंगे. देश देख रहा है. देश देख रहा है कि भारत भारत करके तारत सबको, गाने वाले सहारा ने मैन इन ब्लू की नील खरीदने से भी इस बरस के बाद मना कर दिया है. वजह, पीले दावों वाले येलो डर्टी फैलो श्रीनिवासन को बताया जा रहा है.
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  • 5/11
बुकी बोल, हल्ला बोल
आगाज धांसू हो, तो आगे की सड़क पर धूल कम मिलती है. बुजुर्गों की ये बात सदाजवान शिल्पा और उनके बेराज पति कुंद्रा को मत कहिएगा. क्योंकि धांसू आगाज के बाद इस टीम को सिर्फ आंसू ही मिले हैं. आंसुओँ की इस कहानी को एक ट्रैजिक नायक मिला इस बरस द्रविड़ के रूप में, मगर उनके हिस्से का फुटेज फिलहाल तीन की गिनती तक पहुंचे खलनायक खा गए.  कुश्री असंत, चव्हाण औऱ चांडीला. तौलिए नहीं इन्होंने क्रिकेट के भरोसे को लटकाया, फिर गिरा दिया. हल्ला बोला, खिलाड़ियों ने नहीं, बुकियों ने.
गड़बड़ी की शुरुआत 2010 से हुई, जब टीम को लीग से टर्मिनेट कर दिया गया. मोदी की माया छंटने के दिन थे ये. मालिक मनोज बदाले कोर्ट गए और हथोड़ा उनके पक्ष में ठुंका. टीम की वापसी हो गई बरास्ता कचहरी. मगर इस सीजन में इस रास्ते में तीन रोड़े और आए. फिक्सिंग की मिट्टी से दम पाकर उभरे ये रोड़े फिलहाल दिल्ली पुलिस के पास हैं. सबको आस है कि कोई तौलिया लाल इस बार बचेगा नहीं. रही ये टीम, तो वो नायक द्रविड़ के सख्त चेहरे से बोले गए रिटायरमेंट के फैसले के बाद फसल कटे उजाड़ खेत सी दिख रही है.
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  • 6/11
शाहरुख साइट राइडर्स
टीम की जान, आन बान शान. न कोई गांगुली न कोई गंभीर. इसके लिए बस खान. खानों में खान, शाहरुख खान. मगर ये फिलिम नहीं रिएलिटी है. स्क्रिप्ट हीरो के साथ बेरहमी से पेश आती है. साथ में हीरोइन जूही चावला के साथ भी. उनके पति जय मेहता का सीमेंट यहां काम नहीं आता. तो जान सिर्फ पिछले सीजन में दिखी. मगर उसी साल आन गंवाई वानखेड़े में अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे गार्ड से भिड़कर शाहरुख ने. बान बोले तो बाना हर दो साल में बदलता है, मगर किस्मत अटकी रहती है और शान, तो उसके शो के लिए शाहरुख हर कहीं दिखते हैं. बस पिच पर ही नहीं पहुंच पाते. पिक्चर चेन्नई एक्सप्रेस में जो बिजी हैं. और टीम टीवी पर दूसरी टीमों के एलिमिनेटर और फाइनल मैच देखने में.
पनौती का प्रसाद सिर्फ यहीं नहीं बंटा. इसका हिस्सा मेन स्पॉन्सर नोकिया को भी मिला. इसे पब्लिक ने नो किया, प्रॉफिट नो हुआ औऱ फिर, नो नो तुम किसी से न कहना, का गाना बस बजे ही जा रहा है.
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  • 7/11
नो डेयर नाम के डेविल्स
इसके मालिक जीएमआर हैं. एयरपोर्ट बनाया दिल्ली का, इंटरनेशनल. चला भी रहे हैं उसे. मगर इंटरनेशनल सितारों महेला और वार्नर से सजी टीम नहीं चला पा रहे. ऑडिटर हैं कि मानते नहीं, जब तब रिकॉर्ड खंगालते रहते हैं. रिकॉर्ड टीम मैनेजमेंट ने भी खूब खंगाले थे खिलाड़ियों को साइन करने से पहले. मगर पिच पर सब पुच्च हो गए. यहां वक्त बिताना न भाया. कहीं दिल्ली के इन लालों को लू लग जाती तो. सो डग आउट में पहुंचने की जल्दी रही. और उसके लिए तो आउट होना बनता ही था. दुनिया बरसों पहले ही मुट्ठी में कर चुके थे. अब बारी सुस्ती की थी. और सुस्त लोग अगर बेस में बिना किसी को ठेस पहुंचाए बसे हैं पहली बार, तो इतना हंगामा क्यों है भाई. आखिर डेविल्स की एक डेयरिंग ये भी तो है, पीछे से पहले नंबर पर रहना.
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  • 8/11
अंबानी इंडियंस, रेट हिला देंगे हम
मुंबई के मिडास की टीम है ये. देश का सबसे अमीर आदमी इसका मालिक. पर सादगी देखिए, बॉक्स में बैठकर बच्चों सा मचलकर ताली पीटता है, खुश होता है, इंसान सा दिखता है. तो क्या हुआ कि ये इंसान सा दिखना क्षणिक है. दैवीय ही तो है, दुनिया के सबसे महंगे घर का मालिक होना. फिर वास्तु नाम के किसी अज्ञानी ज्ञान को दोषी ठहराकर उसमें रहने से इनकार करना. और महानताओं का ये सिलसिला यहीं नहीं रुकता. इस ग्रह के सर्वोत्तम क्रिकेटर सचिन भी इसी टीम से खेलते हैं. या कहें कि खेलते थे. खेले, आखिरी तीन मैचों को छोड़कर. और उन्हीं मैचों से मिले सबक ने अंबानी इंडियंस को पहला कप दिला दिया. ग्रहोत्तम क्रिकेटर भी इस दौरान कुछ इंसान से दिखे. मैदान के बाहर बैठकर मुस्कुराए, भोगले के सवालों पर भले ढंग से हंसे भी. इस टीम में पड़ोसी मुल्क का नत्था भी है. स्लिंग, मलिंगा जो हर बार बॉल फेंकने के पहले चुम्मी लेता है उसकी. अश्लील कहीं का. लंका लगा दी शीलता की. पर क्या हुआ, टीम जीत गई न. इस टीम ने वैसे भी दुनिया हिला दी थी उनकी. देश की टीम ने कहा, टेस्ट खेलो आकर. मलिंगा को ये देशभक्ति का टेस्ट पसंद नहीं आया और यहीं अंबानी इंडियंस के लिए खेलते हुए टेस्ट से संन्यास ले लिया.
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  • 9/11
पड़ोस से आकर राइज हुआ सन
हैदराबाद सन राइजर्स के मालिक सन ग्रुप वाले मीडिया के कारोबार में हैं. मगर पिछले हफ्ते ये खबर देने वाले खुद सुर्खियां बने थे. वजह, उनकी एक और कंपनी स्पाइस जेट एयरलाइंस को पिछले क्वार्टर में हुआ 186 करोड़ का घाटा. ये घाटा का धोबी पाट तब लगा, जब सभी (यानी ग्रुप के मालिक मारन भाई औऱ उनके सीए) उम्मीद कर रहे थे कि अब तो मुनाफा होकर रहेगा. ये वही मारन हैं, जो डीएमके नामक पॉलिटिकल कंपनी चलाने वालों के रिश्तेदार हैं. इन दिनों तमिलनाडु में अपोजीशन की पोजीशन संभाल रहे हैं. बेल और जेल के खेल में भी काफी उलझे हैं. करप्शन की कॉफी पीने का इल्जाम है. और इन्हीं सबके चलते रिश्तेदार चले पड़ोस में. मगर कैसी नाइंसाफी है ये. मालिक तमिल हैं, चेन्नई में रहते हैं. उनकी टीम का कप्तान श्रीलंकन है और चेन्नई में खेल नहीं सकता. क्रिकेट की पिच पर पॉलिटिक्स की ये बीमर खौफ पैदा करे, तो करे. तमाशा जारी रहेगा.
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  • 10/11
डिस्चार्ज हुए चार्जर्स
एक था चार्जर्स. डेक्कन चार्जर्स. भट्टी के शो उल्टा पुल्टा का जीता खेलता नमूना. लीग के पहले सीजन में सबसे पीछे रहा. फिर किस्मत उल्टी और अगले सीजन में सबसे आगे रहा. मगर उसके बाद मालिक के पइसे खत्म हो गए. सोचा कि इस टीम में जो खर्चे हैं, सो इसे बेचकर कुछ बचा कमा लें. बोर्ड अंकल नहीं माने. उन्हें टीम को नहीं बेचने दिया, मगर बेच दिया, खुद ही. चेन्नई से लाकर सूरज उगा दिया.
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  • 11/11
हाथी के दांत, बस दिखे और गुम गए
कोच्ची टस्कर्स. एक सीजन में कई खेल खेले. और असल खेल क्रिकेट में भले ही कुछ न कर पाए हों, बाकी में खूब नाम कमाया. इसी फेर में दफा भी कर दिए गए. मसला फंसा मालिकाना हक और मुनाफे की हिस्सेदारी को लेकर. देश ने कॉरपोरेट लहजे का एक नया शब्द सीखा. स्वेट इक्विटी. पसीने पर मत जाइए, बस अकल लगाइए और इतना समझिए कि वो हिस्सेदारी, जिसमें इनपुट जीरो और आउटपुट जितना मालिक चाहें. बोर्ड ने सुंदर सलोने और सुरीले वचन बोलने वाले मंत्री थरूर का लिहाज नहीं किया और उनकी गर्लफ्रेंड सुनंदा पुष्कर को मिल रही स्वेट इक्विटी पर सवाल उठा दिए. सरकार ने भी थरूर को रूड तरीके से कह दिया गया, लाल बत्ती छोड़िए. इस झमेले की शुरुआत करने वाले द कमिश्नर मोदी को भी मात खानी पड़ी. और आखिर में बची टीम, तो वह क्रिकेट इंडिया के ब्लू लगून में डूब गई.
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