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हनीमून पर म्यूजिक कंपोज कर रहे थे ए आर रहमान, रिश्तेदार ने फोन किया तो पत्नी बोलीं 'वो दूसरे कमरे में...'

रहमान ने कई बार इस तरह के किस्से बताए हैं कि वो किस तरह कोई धुन कंपोज करने के लिए घंटों मेहनत करते रहे थे. अब रहमान की डेडिकेशन का एक नया किस्सा सामने आया है, जो फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े उनके एक रिश्तेदार ने बताया है.

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एक्टर रहमान, कंपोजर ए आर रहमान
एक्टर रहमान, कंपोजर ए आर रहमान

ऑस्कर विनर इंडियन म्यूजिक कंपोजर ए आर रहमान ने दुनिया भर में अपने काम से जमकर नाम कमाया है. इसके पीछे सिर्फ रहमान का टैलेंट ही नहीं, सॉलिड डेडिकेशन भी है. रहमान ने कई बार इस तरह के किस्से बताए हैं कि वो किस तरह कोई धुन कंपोज करने के लिए घंटों मेहनत करते रहे थे. 

अब रहमान की डेडिकेशन का एक नया किस्सा सामने आया है, जो फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े उनके एक रिश्तेदार ने बताया है. मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के जानेमाने एक्टर रहमान की पत्नी और म्यूजिक कंपोजर ए आर रहमान की पत्नी बहनें हैं. एक्टर रहमान ने बताया है कि ए आर रहमान अपनी सुहागरात के दिन भी म्यूजिक कम्पोज कर रहे थे. 

म्यूजिक के लिए ए आर रहमान का डेडिकेशन 
सिद्धार्थ कन्नन के साथ इंटरव्यू में जब एक्टर रहमान से उनके म्यूजिक कंपोजर रिलेटिव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, 'कैरेक्टर के मामले में हम दोनों बिलकुल विपरीत ध्रुवों पर हैं. हमारा ऐसा है कि वो नॉर्थ पोल हैं, मैं साउथ पोल. वो बहुत रिजर्व रहते हैं, बहुत आध्यात्मिक हैं. वो शांत रहते हैं और बहुत बहुत डेडीकेटेड हैं. मैं बहुत ओपन हूं. मुझे याद है कि जब उनकी शादी हुई, वो मेरी साली को हनीमून के लिए एक हिल स्टेशन लेकर गए. मैंने उन दोनों को रात में फोन किया, करीब 12 या 1 बज रहे थे... वो आलरेडी सो चुकी थीं, उन्होंने ही फोन उठाया. मैंने पूछा- 'रहमान कहां हैं?' उन्होंने कहा- 'पता नहीं.' वो एक दूसरे कमरे में अपनी वीणा पर प्रैक्टिस कर रहे थे, वो कुछ कंपोज कर रहे थे. वो इस तरह के आदमी हैं.' 

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एक्टर ने बताया कि रहमान अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं और बहुत ज्यादा बातें नहीं करते हैं. उन्होंने आगे बताया, 'और मैं बिल्कुल उल्टा हूं. मैं गॉसिप नहीं करता, लेकिन मुझे गॉसिप सुनना पसंद है!' 

बहुत आध्यात्मिक हैं रहमान 
ए आर रहमान अक्सर इस बारे में बात करते हैं कि उनका स्वभाव कितना आध्यात्मिक है. उन्होंने इस्लाम अपनाने को लेकर भी खूब बात की हैं. ऑक्सफोर्ड यूनियन पर रहमान ने कहा था, 'हम सभी का डार्क टाइम आता है. मगर एक बात तय है; दुनिया में हमारा सफर बहुत छोटा है. हम पैदा हुए थे और एक दिन हमें चले जाना है. ये हमारे लिए परमानेंट जगह नहीं है. हम कहां जाते हैं ये हमें नहीं पता होता. ये हर व्यक्ति की अपनी सोच और विश्वास पर निर्भर करता है.' 

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