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फिल्‍म समीक्षा: 'गो गोवा गॉन'

डायरेक्टर राज निदिमोरू और कृष्णा डीके की जोड़ी बॉलीवुड की पहली जॉम्बी कॉमेडी लेकर आ रही है. फिल्म में सैफ अली खान एकदम नए अंदाज में दिख रहे हैं. आइए जानते हैं कि गो गोवा गॉन में क्या खास है और क्या है खामियां

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सैफ अली खान
सैफ अली खान

फिल्म समीक्षा: गो गोवा गॉन
डायरेक्टर: राज निदिमोरू और कृष्णा डीके
कलाकार: सैफ अली खान, कुणाल खेमू, वीर दास और आनंद तिवारी

मरे हुए लोगों को मारना वाकई बॉलीवुड के लिए नया शगल है और यह कूल काम 'गो गोवा गॉन' के कलाकार करते दिख रहे हैं. यह पहला मौका है जब जॉम्बी किसी भारतीय फिल्म में नजर आ रहे हैं.

जॉम्बी न तो भूत है और न ही जिंदा शख्स. एक ऐसी फिल्मी कल्पना जो किसी भी तर्क से परे नजर आती है. अभी तक हॉलीवुड में जॉम्बी बेस्ड फिल्में बनती आई थीं, लेकिन डायरेक्टर जोड़ी राज निदिमोरू और कृष्णा डीके ने एक सफल कोशिश की है. वे फिल्म में हंसाते हैं, थोड़ा बहुत डराते हैं और फिल्म को हॉलीवुड की तर्ज पर आगे भी बढ़ाते हैं. फिल्म माइंडलेस जॉम-कॉम (जॉम्बी कॉमेडी) है.

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लेकिन बॉलीवुड के डायरेक्टरों की यह बात समझ नहीं आ रही है कि पहला हाफ टाइट बनाने के बाद दूसरे हाफ में वे क्यों ढील दिए जा रहे हैं. पिछली कुछ फिल्मों में ऐसा ही अनुभव रहा है और यही बात थोड़ी बहुत 'गो गोवा गॉन' में खटकती है. कई खामियां होने के बावजूद फिल्म मजेदार है और इन कमियों पर ध्यान नहीं जाता है.

कहानी में कितना दम
'गो गोवा गॉन' किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह चलती है. लव (वीर दास) एक असफल प्रेम कहानी का नायक. हार्दिक (कुणाल खेमू) नौकरी से हाथ धो बैठा मस्तीखोर युवक जबकि बनी (आनंद तिवारी) को ऑफिस से गोवा घूमने का शानदार पैकेज मिलता है. बस तीनों गोवा के लिए निकल पड़ते हैं. वहां वे लूना (पूजा गुप्ता) से मिलते हैं और वे उन्हें रेव पार्टी में ले जाती है. जब सुबह होती है तो ये लोग जॉम्बी से भरे एक आइलैंड में खुद को पाते हैं. बस, यही से शुरू होती है रोमांच भरे एक सफर की कहानी. उनके साथ जॉम्बी किलर बोरिस (सैफ अली खान) होता है. जंगल, समुद्र औऱ एकाकीपन का डायरेक्टर जोड़ी ने बखूबी इस्तेमाल किया है. फ्रैश स्टोरी लाइन (बॉलीवुड के लिहाज से) कूल है, कहानी में कुछ लोचे हैं लेकिन ओवरआल परफॉर्मेंस के चलते इस ओर ध्यान ही नहीं जाता है.

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स्टार अपील
कुणाल खेमू जबरदस्त है. उनके वनलाइनर कमाल के हैं. उन्होंने दिखा दिया है कि कॉमेडी में उनकी टाइमिंग जबरदस्त है. वीर दास के तेवर बरकरार हैं. आनंद तिवारी भी बनी के रोल में कमाल के लगे हैं. जबकि बोरिस बने सैफ अली खान तो बहुत ही दिलचस्प हैं. उनका यह डायलॉग तो बहुत ही मजेदार लगता है, लेट्स गो, कील डेड पीपल. उनका उच्चारण वाकई चेहरे पर मुस्कराहट ला देता है. पूजा गुप्ता के लिए करने को कुछ ज्यादा नहीं है. जहां तक जॉम्बी की बात है तो वे खूब जमे हैं.

किस्सा कमाई का
मजेदार टाइमपास है गो गोवा गॉन. फिल्म के निर्माता और निर्देशक पहले ही इस बात की घोषणा कर चुके हैं कि फिल्म सैफ अली खान की आमतौर पर बनने वाली फिल्मों की अपेक्षा बहुत कम बजट की है तो इसे देखते हुए इसके बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई करने की पूरी संभावनाएं हैं. फिल्म की यूएसपी इसका यूथ ओरियंटेड नेचर है, मजेदार डायलॉग हैं, नया कॉन्सेप्ट है और चार्टबस्टर म्यूजिक है. ऐसे में जॉम्बी किलिंग का लुत्फ लेना तो बनता है!

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