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मौत से नहीं लगता जैकी श्रॉफ को डर, बोले- जाने का टिकट कंफर्म है, लेकिन...

जैकी श्रॉफ ने आज तक डॉट इन से खास बातचीत की. उन्होंने टफ इंडस्ट्री और लगातार बढ़ रहे प्रेशर पर बात की. जैकी ने कहा- बहुत टफ है. यहां ज्यादातर लोग प्रेशर में ही रहते हैं. मैं तो कहता रहता हूं कि खुद को इतना सीरियसली मत लिया करो. जो कुछ मिला है, उसके लिए ऊपरवाले का शुक्रिया अदा करो.

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जैकी श्रॉफ
जैकी श्रॉफ

जैकी श्रॉफ ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक किरदार करते रहे हैं. इन दिनों जैकी अपनी अपकमिंग फिल्म 'लाइफ इज गुड' को लेकर चर्चा में हैं. जैकी इस मुलाकात में हमसे अपनी फिल्म और जिंदगी जीने के फलसफे पर ढेर सारी बातचीत करते हैं. 

आपने अपने करियर में हमेशा अनकन्वेंशनल किरदारों को प्राथमिकता दी है. लाइफ इज गुड किस मायने में अलग साबित होगी?
-दरअसल मुझे हमेशा से अनकन्वेंशनल रोल्स ही ऑफर होते रहे हैं. शुरुआत से ही मैं अतरंगी रोल्स करता रहा हूं. बाकि कभी सोचा ही नहीं कि क्यों कर रहा हूं? क्या कर रहा हूं? मैंने हमेशा से चाहे वो लाइफ की बात हो या करियर, मुझे जो मिलता गया, उसे बस दिल से निभाता गया और आगे की सोचने पर यकीन करता रहा. रही बात इस फिल्म की, तो इसमें फैंस के लिए एक ऐसा किरदार लेकर आया हूं, जो बहुत निराश और दुखी किस्म का इंसान है. वो जिंदगीभर अकेला रहा है, तो उसे लगता है कि बस इसे कैसे भी खत्म कर दिया जाए. हालांकि वो अपने स्वाभाव को कैसे बदलता है और जिंदगी काटने के बजाए उसे जीने लगता है, कहानी यह बात बयां करती है. 

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जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई मौत है, लेकिन वही डराती है. यह स्वीकारना मुश्किल है?
-सच कहूं, तो मुझे डर नहीं लगता है. इसमें डरने वाली कोई बात ही नहीं है. देखो, जाने का टिकट कंफर्म है, लेकिन डेट कौन सी है यह तय नहीं है. तो फिर क्यों डर कर जीना है, मैं तो कहूंगा, जितना मजा लेकर जी सकते हो, उतना मजा लेते जाओ. फिल्म के डायरेक्टर आनंद महादेवन जब मेरे पास स्क्रिप्ट लेकर आए, तो मुझे कहानी की लाइन बहुत अच्छी लगी, और मैंने इसलिए भी इसे किया भी, ताकि मैं लोगों को एक मैसेज दे सकूं कि अपनी जिंदगी को खत्म करने के बजाए इसे अच्छे से जीओ. कोई रहे न रहे लेकिन आप खुद में कंटेंट रहो. 

लेकिन ऐसे कई एक्टर्स हैं, जिन्होंने सुसाइड कर खुद को खत्म कर लिया. क्या इस फील्ड के लोग ज्यादा अघाती होते हैं?
- बेशक, यह फील्ड बहुत टफ है. यहां ज्यादातर लोग प्रेशर में ही रहते हैं. मैं तो कहता रहता हूं कि खुद को इतना सीरियसली मत लिया करो. जो कुछ मिला है, उसके लिए ऊपरवाले का शुक्रिया अदा करो. देखो यहां हर किसी की जर्नी अलग है. यहां कोई सूरज है, तो कोई चांद, तो कोई ज्यूपीटर, वीनस भी बनता है. हर कोई सूरज ही बने यह जरूरी नहीं है न. किसी प्लेन के अंदर एक पुर्जा भी खराब हो जाए, तो उसे रोक दिया जाता है. सबकी अपनी अहमियत होती है. क्यों खुद को हमेशा छोटा समझकर बोझ लेते हुए जिंदगी काटना है. उन्हें यह भी समझना चाहिए कि वो इतने स्वार्थी कैसे हो जाते हैं कि खुद हार मानकर निकल लेते हैं लेकिन जो पीछे परिवार छोड़ जाते हैं, उसका क्या?

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हम जैकी श्रॉफ की जिंदादिली से तो वाकिफ हैं लेकिन निजी जिंदगी में अपने टफ टाइम को कैसे डील करते हैं?
-मैं बस सांस लेता हूं(हंसते हुए).. नहीं, बुरे वक्त में अपने आसपास के लोगों को देखता हूं. अपनी बीवी, बच्चों को देखता हूं, तो बस उनकी मौजूदगी का एहसास मुझे बाकी टेंशन से निकाल देता है. हां, घाव बहुत मिले हैं, लेकिन मैंने हमेशा वक्त पर यकीन किया है. मैं मानता हूं कि वक्त सबकुछ भर देता है. बस आप अलर्ट हो जाते हैं, कि जिसने घाव या तकलीफ दी है, उससे दूर रहेंगे. यार एक ही तो जिंदगी है, कितना गिला-शिकवा करते रहेंगे. 

पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आज के और उस वक्त के जैकी में क्या अंतर नजर आता है?
- बात अगर शुरू होगी, तो बहुत दूर तक जाएगी... जिंदगी तो इसी खोने-पाने का नाम है. मैंने अपनी इस जर्नी में माता-पिता और भाई को खोया है, हालांकि उसकी जगह पर कृष्णा, टाइगर और मेरी वाइफ आ गए. मेरे तीन करीबी चले गए, तो उनकी जगह ये तीन आ गए. कल को मैं चला जाऊंगा, तो मेरी जगह कोई और आ जाएगा. तस्वीरें हट जाएंगी. अभी तो मेरे घर पर माता-पिता की तस्वीरें हैं, कल को टाइगर का बच्चा आएगा, तो मेरी तस्वीरें लग जाएंगी. उसके आगे जनरेशन वाले मेरी तस्वीर हटा देंगे. यही सच्चाई है और इसे स्वीकार कर चुका हूं. 

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आप बॉलीवुड का अहम हिस्सा रहे हैं. इंडस्ट्री को लेकर इतनी निगेटिविटी फैली है. उसके डिफेंस में क्या कहना चाहेंगे? सोशल मीडिया देखकर दुख होता है?
-यह एक फेज है, लोग अपनी भड़ास को निकालना चाहते हैं, तो उन्हें मौका दें. मुझे लगता है कि हमें पहले खुद के अंदर झांकने की जरूरत है. आप रोजाना सुबह उठकर खुद की आंखों में ही देख लें कि हममें कितना छल कपट है, तो फिर आप दूसरों को देखेंगे ही नहीं. मैंने तो हमेशा सामने वाले में चांद ही देखा है, दाग नजर नहीं आते हैं. मुझमें खुद ही इतना दाग है कि दूसरों में क्या ढूंढने जाऊं. अगर आपको कोई निगेटिव कहता है, तो आप उसके नजरिये को समझने की कोशिश करें. हर इंसान को अपना ओपिनियन देने का हक है और उनकी यह प्रवृत्ती भी रही है. जिंदगी खूबसूरत है और हम उसे कैसे जीते हैं यह हम पर निर्भर करता है. मुझे तो सबका गम ज्यादा बड़ा लगता है. सिग्नल के बच्चों को ही देखो, पत्थर काटते हैं उनको देखो, डांबर बनाते हैं उनकी जिंदगी को देखो और फिर अपना गम सोचकर रोना शुरू करो यार.

 

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