ऐसे समय पर, जब उद्योगों के विकास की राह में पर्यावरण मंजूरी बड़ी अड़चन बनती जा रही है, आईआईटी खड़गपुर ने चुनौतियों से निपटने में मदद के लिए पर्यावरण इंजीनियरों का दल तैयार करने का फैसला किया है.
आईआईटी में पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी का शुरू होने वाला नया स्कूल 2015 के एकेडमिक सत्र से बीटेक और एमटेक दोनों स्तरों पर सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग की दोहरी डिग्री की पेशकश करेगा.
स्कूल के प्रमुख प्रोफेसर जयंत भट्टाचार्य ने कहा कि अभी पर्यावरण इंजीनियरों की मांग काफी ज्यादा है. वे केवल कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी अभियान का ही हिस्सा नहीं बल्कि वे कंपनी के विकास के वाहक हैं और लागत घटाकर मुनाफा बढ़ाते हैं.
पाठ्यक्रमों में पर्यावरण मुद्दों के इंजीनियरिंग समाधान पर फोकस होगा. भट्टाचार्य ने कहा, ‘हमारे पर्यावरण इंजीनियर इन सब मुद्दों से निपटने के लिए प्रशिक्षित होंगे.’ अनुमान है कि भारतीय उद्योगों को करीब 10,000 पर्यावरण इंजीनियरों की जरूरत है और इनकी कमी की वजह से रासायनिक इंजीनियरों को दोहरी भूमिका निभानी पड़ती है.
इनपुट: भाषा