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BHU में संस्कृत भाषा नहीं इस विषय के गैर हिंदू टीचर पर हो रहा विरोध

हकीकत ये है कि छात्रों का विरोध इस बात पर है कि कोई भी प्रोफेसर जो कि हिंदू ना हो, वह हिंदू धर्म संस्कृति के बारे में कैसे पढ़ा सकता है.

प्रो फिरोज खान प्रो फिरोज खान

  • BHU के छात्र 14 दिन से कुलपति आवास के सामने दे रहे हैं धरना
  • संस्कृत को भाषा के तौर पर पढ़ाए जाने पर नहीं है कोई ऐतराज

उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में मुस्लिम टीचर द्वारा संस्कृत पढ़ाए जाने वाले विवाद में नई बात सामने आ रही है. अभी तक ये माना जा रहा था कि BHU के छात्र किसी गैर हिंदू प्रोफेसर द्वारा संस्कृत पढ़ाए जाने के खिलाफ हैं, लेकिन हकीकत ये है कि छात्रों का विरोध इस बात पर है कि कोई भी प्रोफेसर जो कि हिंदू ना हो, वह हिंदू धर्म संस्कृति और विज्ञान के बारे में कैसे पढ़ा सकता है.

जानें- क्या है पूरा मामला

दरअसल बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में दो विभाग हैं जिनमें से एक संस्कृत भाषा, हिंदी विभाग के अंतर्गत आता है और दूसरा संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग अलग से बना हुआ विभाग है. इन दोनों में अलग-अलग तरीके की पढ़ाई होती है. संस्कृत विभाग में संस्कृत को भाषा की तरह पढ़ाया जाता है. वहीं, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग में सनातन धर्म के रीति-रिवाजों, मंत्रों, श्लोकों, पूजा पाठ के तौर-तरीकों और पूजा पाठ के बारे में बताया जाता है.

छात्रों का कहना है कि कोई मुस्लिम व्यक्ति कैसे हिंदू धर्म के पूजा पाठ के बारे में बता सकता है, पढ़ा सकता है. छात्रों का विरोध इसी बात पर है. उनका कहना है कि संस्कृत को भाषा के तौर पर किसी भी जाति- धर्म के टीचर द्वारा पढ़ाए जाने पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है.

अपनी इसी बात के आधार पर BHU के छात्र पिछले 14 दिनों से कुलपति के आवास के सामने धरना दे रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक इन मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान को दूसरे विभाग में ट्रांसफर नहीं किया जाता तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.

इस मामले में कुलपति कार्यालय से पहले ही साफ किया जा चुका है कि फिरोज खान की नियुक्ति सारे नियम और कायदे-कानून के आधार पर किया गया है. चयन के दौरान फिरोज खान के सबसे ज्यादा अंक आए थे, उनकी नियुक्ति उसी आधार पर की गई है.

लिहाजा कुलपति फिरोज खान के चयन को लेकर अपनी बात पर बने हुए हैं. दूसरी तरफ छात्रों ने कुलपति आवास के सामने पोस्टर बैनर लगाकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा है. इस बारे में अभी तक कुलपति से छात्रों की कोई सार्थक बातचीत नहीं हो पाई है और लगातार विरोध बना हुआ है.

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