आज एनआर नारायणमूर्ति का जन्मदिन है. नारायणमूर्ति का नाम सुनते ही दिमाग में इंफोसिस का नाम भी आता है, जो आज देश की टॉप आईटी कंपनियों में से एक है. लेकिन क्या आप जानते हैं करोड़ों की कंपनी इंफोसिस उधार के पैसे से शुरू हुई थी? आइए नारायणमूर्ति के जन्मदिन पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कई किस्से और कैसे एक छोटी सी कंपनी, इंफोसिस बनी...
इंफोसिस की कामयाबी के पीछे एनआर नारायणमूर्ति का हाथ है. नारायणमूर्ति की सादगी का आज हर कोई कायल है. उनका जन्म 20 अगस्त 1946 को कर्नाटक के मैसूर में हुआ था. उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग और 1969 में आईआईटी कानपुर से मास्टर ऑफ टैक्नोलाजी की पढ़ाई की. कहा जाता है कि उनकी पढ़ाई का खर्च उनके एक टीचर ने दिया था.
उसके बाद उन्होंने पाटनी कंप्यूटर सिस्टम्स (पुणे) से अपने करियर की शुरुआत की. उसके बाद उन्होंने अपने दोस्त शशिकांत शर्मा और प्रोफेसर कृष्णय्या के साथ 1975 में पुणे में सिस्टम रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी. हालांकि उनका इस कंपनी के साथ ज्यादा दिन साथ नहीं रहा.
उसके बाद उन्होंने पाटनी कंप्यूटर सिस्टम्स (पुणे) से अपने करियर की शुरुआत की. उसके बाद उन्होंने अपने दोस्त शशिकांत शर्मा और प्रोफेसर कृष्णय्या के साथ 1975 में पुणे में सिस्टम रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी. हालांकि उनका इस कंपनी के साथ ज्यादा दिन साथ नहीं रहा.
1981 में की थी कंपनी की शुरुआत: नारायणमूर्ति ने 1981 में 6 इंजीनियरों के साथ मिलकर पुणे में आईटी कंपनी इन्फोसिस शुरू की थी. दरअसल, मूर्ति और अन्य के पास पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने टाटा इंडस्ट्रीज में कार्यरत अपनी पत्नी सुधा मूर्ति से 10,000 रुपये उधार लिए थे. मूर्ति का घर ही कंपनी का मुख्यालय बना और 1983 में इसका मुख्यालय बेंगलुरु स्थानांतरित किया गया था.
1981 में नारायण मूर्ति, नंदन नीलेकणी, एस गोपालकृष्णन, एसडी शिबुलाल, के दिनेश और अशोक अरोड़ा ने पटनी कंप्यूटर्स छोड़कर पुणे में इंफोसिस कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की थी. अब कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है और अब कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 50 हजार से अधिक है और 12 देशों में कंपनी की शाखाएं हैं.
इंफोसिस की प्रगति में कई मुश्किलें भी आई हैं, लेकिन नारायणमूर्ति के हौसले से कंपनी इस मुकाम पर पंहुचीं. वहीं 1999 में इंफोसिस ने 100 मिलियन डॉलर का आंकड़ा छू लिया. इसी साल यह नैस्डेक में लिस्टेड होने वाली भारत की पहली आईटी कंपनी बन गई. अभी कंपनी की नेट वर्थ 2.7 लाख करोड़ रुपए है.
नारायणमूर्ति साल 1981 से 2002 तक कंपनी के सीईओ और 1981 से 2011 तक चेयरमैन और चीफ मेंटर रहे. साथ ही उन्होंने अगस्त 2011 से मई 2013 तक चेयरमैन एमेरिटस रहे.
उन्हें पद्म श्री, पद्म विभूषण और ऑफिसर ऑफ द लेजियन ऑफ ऑनर (फ्रांस सरकार) से सम्मानित किया जा चुका है. नारायण मूर्ति अब अवकाश ग्रहण कर चुके हैं लेकिन वे इंफोसिस के मानद चेयरमैन बने रहेंगे. उनकी संपत्ति 2 बिलियन डॉलर यानी 13900 करोड़ रुपये है.