आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा कि परिवार हम खुद नहीं चुनते, लेकिन अपने दोस्त हम खुद ही चुनते हैं. आप जो दोस्त चुनते हैं उनपर भरोसा भी बहुत करते हैं. जीवन में दोस्तों की बहुत अहमियत होती है. आप अपने दिन का बहुत सा वक्त अपने दोस्तों के साथ बिताते हैं. आप जिसके साथ ज्यादा वक्त बिताते हैं, कहीं न कहीं उनकी पर्सनैलिटी, बर्ताव और सोच और रहने का तरीके आपमें भी झलकने लगता है. इसलिए जरूरी होता है कि दोस्तों का चुनाव बहुत सोच-समझकर करें.
कई बार होता है कि हमें अपने दोस्तों से इतना लगाव हो जाता है कि उनकी कुछ बुरी आदतों को हम नजरअंदाज भी करने लगते हैं. दोस्तों की बुरी आदतों को नजरअंदाज करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन दोस्तों की कुछ ऐसी आदतें भी होती हैं जिन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
हम आपको कुछ ऐसी आदतों के बारे में बता रहे हैं, जो किसी दोस्त में दिखें तो तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए. दरअसल, ये वो आदते हैं जिसका असर आपके कॉन्फिडेंस, आपकी पर्सनैलिटी पर नजर आ सकता है. आइए जानते हैं कौन सी हैं वो आदतें.
> जरूरत के वक्त कॉल करना: सबसे पहले इस बात को नोटिस करें कि किसी ऐसे व्यक्ति को दोस्त नहीं समझें जो केवल जरूरत पड़ने पर ही आपसे बात करता हो. अगर ऐसा है तो आपको समझ लेना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति आपके साथ दोस्ती के लिए नहीं बल्कि अपने मतलब के लिए है. वो बस आपको दोस्त इसलिए कह रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर आप उसकी मदद करें. आजकल के व्यस्त जीवन में आप हर रोज अपने दोस्तों से बात करने का वक्त नहीं निकाल पाते लेकिन अगर कोई आपको सिर्फ काम के वक्त ही याद कर रहा है तो आपको इस बारे में सोचने की जरूरत है.
> मतभेद की स्थिति में आपको गलत ठहराना: जब आप किसी के साथ दोस्ती करते हैं तो कई बार ऐसी स्थिति आती है जहां आपका अपने दोस्तों के साथ किसी चीज को लेकर मतभेद हो जाए. दोस्तों के साथ मतभेद सामान्य है, लेकिन अगर आपकी लिस्ट में कोई ऐसा दोस्त है जो किसी भी मतभेद के बाद आपको ये एहसास दिलाता है कि आप दोनों के बीच मतभेद केवल आपकी ही गलती है तो आपको इस बारे में सोचना चाहिए. साथ ही, आपको इस बात का बुरा न लगे, ऐसे दोस्त आपको आपकी गलतियां गिनवाने के बाद हर वक्त ये कहते हैं कि वो आपकी भलाई के लिए ही ऐसा बोल रहे हैं. वो इस तरह से आपसे बाते करते हैं कि आप खुद के विचारों पर ही सवाल करने लगते हैं.
> केवल अपने बारे में ही बात करना: दोस्त वो होता है जिसके सामने आप कोई भी बात करके हल्का और खुश महसूस करते हैं. जो लोग बहुत कम बात करना पसंद करते हैं, वो भी आपने दोस्तों के सामने खुलकर अपनी बातें कह पाते हैं. कोई भी दोस्ती तब गहरी होती है जब आप अपने दोस्त से खुलकर अपने मन की बात कर सकें और आपका दोस्त भी आपके सामने अपनी बात रख सके. अगर आपकी लिस्ट में कोई ऐसा दोस्त है जो हर वक्त अपनी ही बात करता है और अपनी ही चीजों को शेयर करता है तो आपको थोड़ा सोचने की जरूरत है. अगर आप अपने दोस्त के सामने अपने मन की बात नहीं कर पा रहे हैं या आपको लगता है कि जब भी आप कोई बात शेयर करने की कोशिश कर रहे हैं तो सामने वाला उस बात में भी अपनी बात करने लगे तो आपको ऐसे दोस्त से थोड़ी सतर्क रहना चाहिए.
> आपको जज करना: अगर आप अपने दोस्त के सामने कोई बात कह रहे हैं और वो उस बात के लिए आपको जज कर रहा है तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है. मान लीजिए आप अपने लिए कोई निर्णय लेते हैं, हो सकता है वो निर्णय आपके लिए सही न हो, लेकिन अगर आपका कोई भी दोस्त आपको उस बारे में समझाने की जगह उस निर्णय के लिए आपको जज कर रहा है तो आपको ये सोचने की जरूरत है कि क्या सामने वाला व्यक्ति वाकई आपका दोस्त है.
> दूसरों के सामने आपका मजाक उड़ाना: दोस्तों के बीच हंसी-मजाक चलता रहता है, लेकिन जब कोई तीसरा व्यक्ति आपके साथ है और आपका दोस्त खुद को बेहतर दिखाने के लिए बात-बात पर आपका मजाक उड़ा रहा है तो मुमकिन है कि वो आपका सच्चा दोस्त नहीं है. जो आपके सच्चे दोस्त होते हैं, वो किसी बाहरी व्यक्ति के सामने आपके साथ खड़े होते हैं. अगर किसी तीसरे व्यक्ति के सामने आपका दोस्त आपका मजाक उड़ाकर आपको नीचा दिखा रहा है तो आपको सतर्क होने की जरूरत है.