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दिल्ली में है 'सिमोन बोलिवर मार्ग'... क्या आप जानते हैं आखिर ये हैं कौन?

सिमोन बोलिवर मार्ग नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सड़क है, जिसका नाम दक्षिण अमेरिका के स्वतंत्रता सेनानी सिमोन बोलिवर के नाम पर रखा गया है.

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सिमोन बोलिवर मार्ग भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है. (Photo: Google Maps)
सिमोन बोलिवर मार्ग भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है. (Photo: Google Maps)

नई दिल्ली की सड़कों पर चलते हुए कई बार हम नामों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन कुछ सड़कें इतिहास की गहरी कहानियां अपने भीतर समेटे होती हैं. चाणक्यपुरी इलाके में स्थित सिमोन बोलिवर मार्ग भी ऐसी ही एक सड़क है, जो भारत और वेनेजुएला के ऐतिहासिक और वैचारिक रिश्तों की खामोश गवाह है. साइमन बोलिवार ने वेनेजुएला, कोलंबिया, पेरू, इक्वाडोर और बोलीविया जैसे देशों को स्पेन के औपनिवेशिक शासन से आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसी कारण उन्हें “El Libertador” कहा जाता है.

चाणक्यपुरी इलाके में है ऐतिहासिक सड़क
सिमोन बोलिवर मार्ग नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित एक अहम और ऐतिहासिक सड़क है. यह सड़क भारत की राजधानी के सबसे वीआईपी और डिप्लोमैटिक क्षेत्रों में गिनी जाती है, जहां कई विदेशी दूतावास, राजनयिक आवास और अंतरराष्ट्रीय संस्थान मौजूद हैं. घने पेड़ों से घिरी यह सड़क न सिर्फ चाणक्यपुरी को जोड़ती है, बल्कि भारत के वैश्विक रिश्तों और ऐतिहासिक सोच की भी एक शांत झलक पेश करती है. यह सड़क भारत के ग्लोबल साउथ और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक मानी जाती है. 

कई देशों की आजादी का नायक
इस सड़क का नाम दक्षिण अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर के नाम पर रखा गया है, जिन्हें वेनेजुएला, कोलंबिया, पेरू, इक्वाडोर और बोलीविया जैसे देशों की आजादी का नायक माना जाता है. उन्हें ‘एल लिबरेटर’ यानी मुक्तिदाता भी कहा जाता है.

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भारत द्वारा अपने एक प्रमुख मार्ग का नाम सिमोन बोलिवर के नाम पर रखना इस बात का प्रतीक है कि आजादी के बाद भारत ने सिर्फ अपने स्वतंत्रता सेनानियों को ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ने वाले नेताओं को भी सम्मान दिया. साइमन बोलिवार मार्ग कौटिल्य मार्ग और शांति पथ जैसे प्रमुख रास्तों से जुड़ा हुआ है, जिससे यह सड़क रणनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बन जाती है. इस इलाके में लैटिन अमेरिकी देशों समेत कई राष्ट्रों के दूतावास स्थित हैं, जिससे इस सड़क का नाम और भी सार्थक प्रतीत होता है.

भारत में उनके नाम पर सड़क क्यों?
आजादी के बाद भारत ने कई सड़कों के नाम ऐसे वैश्विक नेताओं पर रखे, जिन्होंने उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष किया. इसी सोच के तहत सिमोन बोलिवर मार्ग का नामकरण हुआ, जो भारत की अंतरराष्ट्रीय और गैर-पक्षपाती (Non-Aligned) नीति को दर्शाता है. यह सड़क भारत और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक रिश्तों, ऊर्जा सहयोग और वैचारिक जुड़ाव की भी प्रतीक है.

भारत–वेनेजुएला कनेक्शन
यह सड़क सिर्फ नाम भर नहीं है, बल्कि भारत और वेनेजुएला के रिश्तों की प्रतीक है. 2005 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज भारत आए थे. 2012 में निकोलस मादुरो (तत्कालीन विदेश मंत्री) भारत दौरे पर आए. दोनों देशों के बीच ऊर्जा, तेल, कूटनीति और नॉन-अलाइनमेंट मूवमेंट को लेकर रिश्ते रहे हैं. भारत खुद एक औपनिवेशिक इतिहास से निकला देश है, इसलिए उसने लैटिन अमेरिका के देशों से वैचारिक जुड़ाव महसूस किया.

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