देश में एमबीए या अन्य मैनेजमेंट कोर्स कर रहे विद्यार्थियों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि प्रबंधन की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों को नौकरी नहीं मिल रही है और यह संख्या पिछले पांच साल में सबसे कम है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016-17 में व्यवसाय प्रशासन में मास्टर (एमबीए) करने वाले 47 फीसदी छात्रों को ही कोर्स पूरा होने के साथ नौकरी मिल पाई, जो कि पिछले साल से 4 फीसदी कम है और पांच सालों में सबसे कम है. इसी अवधि में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा (पीजीडीएम) करने वाले 60 फीसदी लोगों को ही नौकरी मिल पाई जो पिछले साल के मुकाबले 12 फीसदी कम है.
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इन आंकड़ों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) शामिल नहीं है, क्योंकि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इसके दायरे में नहीं आते. बता दें कि देश में करीब 5000 मैनेजमेंट संस्थान है और इन संस्थानों से करीब 2 लाख बच्चे पास हुए हैं.
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सामने आए इन आंकड़ों को लेकर एआईसीटीई के अधिकारी भी चिंतित हैं. हालांकि, मानव संसाधन के जानकार इस समस्या के लिए श्रम बाजार की चुप्पी और छात्रों की गुणवत्ता में कमी को जिम्मेदार मानते हैं.