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पति ने छोड़ा, बैंक ने घर छीना, इच्छामृत्यु नहीं मिली तो की खुदकुशी

उसके पति अखिलेश खंडेलवाल एक IPS अधिकारी के साथ अवैध संबंध का आरोप जड़कर घर से बाहर निकाल दिया था.

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सविता खंडेलवाल (फाइल फोटो)
सविता खंडेलवाल (फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ में साल भर पहले महिला आयोग से इच्छामृत्यु मांगने वाली एक महिला ने आखिरकार खुदकुशी कर ली. महिला को उसके पति ने अवैध संबंध के शक में छोड़ दिया था, जिसके बाद महिला अपने 11 साल के बच्चे के साथ दर-दर की ठोकरें खा रही थी. आखिरकार जीवन की दुश्वारियों से तंग आकर महिला ने शुक्रवार को जहर खाकर जान दे दी.

बताया जा रहा है कि सविता खंडेलवाल के पास न तो कोई रोजगार था और न ही आजीविका का कोई दूसरा साधन. उसके पति अखिलेश खंडेलवाल एक IPS अधिकारी के साथ अवैध संबंध का आरोप जड़कर घर से बाहर निकाल दिया था.

हालांकि जानकारी के मुताबिक, जिस आईजी स्तर के अधिकारी से सविता का अवैध संबंध बताया जा रहा है, उसके सविता से परिवार अच्छे संबंध रहे हैं. सविता खंडेलवाल साल भर पहले घरेलू हिंसा और पति द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत लेकर राज्य महिला आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठी थी.

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तब आयोग के अफसरों और उसके परिजनों ने समझा-बुझा कर उसे वापस घर भेज दिया था. सविता ने मांग की थी कि IPS अधिकारी खुद उसके पति और परिजनों को हकीकत बताएं. लेकिन IPS अधिकारी ने इस घटना को लेकर न तो कोई प्रतिक्रिया जाहिर की और न ही उसके परिवार को किसी तरह की सफाई दी.

साल भर बाद भी जब मसला नहीं सुलझा तो तंग आकर सविता ने ख़ुदकुशी कर ली. सविता ने धमतरी जिले के कलेक्टर और एसपी को भी शिकायत कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई थी. लेकिन प्रशासन ने यह कहते हुए कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था कि पति पत्नी के विवाद को स्थानीय अदालत खारिज कर चुकी है.

बैंक ने भी कर दिया था घर से बेघर

बताया जा रहा है कि अखिलेश खंडेलवाल से अलग होने के बाद सविता धमतरी के अमलतास कॉलोनी में एक मकान में अपने बेटे के साथ रह रही थी. 18 जून को बैंक ने मकान की किश्त जमा नहीं होने के चलते उस मकान को सील कर अपने कब्जे में ले लिया था.

इसके बाद सविता पड़ोस के ही एक मंदिर में रहने लगी . सविता अपने बच्चे की कस्टडी और संपत्ति को लेकर 8 साल से अपने पति के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही थी. धमतरी के बड़े उद्योगपति घराने में उसकी शादी हुई थी.

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सविता की ख़ुदकुशी ने महिला आयोग के काम-काज पर भी सवालिया निशान लगा दिया है. दरअसल बीते 2-3 साल से उसकी तमाम शिकायतें आयोग के दफ्तर में धूल खाती रहीं. हालांकि उसकी मौत के बाद प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष हर्षिता पांडे ने कहा कि यह मामला बेहद पेचीदा था और कोर्ट में विचाराधीन भी था.

उनके मुताबिक आयोग की अपनी सीमाएं हैं, इसलिए वह ज्यादा कुछ नहीं कर पाईं. फ़िलहाल पुलिस ने उसका शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

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