मुंबई की विशेष नार्कोटिक्स ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज अदालत ने जम्मू-कश्मीर केडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी साजी मोहन और उनके बॉडीगार्ड को ड्रग्स मामले में दोषी ठहराया है. साजी मोहन पर NCB में रहते हुए ड्रग्स कारोबार करने का आरोप था. वहीं, अदालत ने इस मामले में आरोपी एक व्यक्ति को बरी कर दिया.
मुंबई की विशेष एनडीपीएस अदालत ने साजी मोहन को 15 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जबकि उनके अंगरक्षक को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. साजी मोहन को एटीएस ने वर्ष 2009 में 44 किलोग्राम ड्रग्स के साथ 12 किलोग्राम हेरोइन सहित गिरफ्तार किया था. वह तब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के साथ केरल में उप-निदेशक के रूप में तैनात थे.
केरल में तैनाती से पहले, साजी मोहन चंडीगढ़ में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर थे, जहां वे कथित रूप से एजेंसी द्वारा जब्त नशीले पदार्थों के भण्डारण में शामिल थे और कई प्रमुख ड्रग किंगपिन के साथ उनके संबंध थे. महाराष्ट्र एटीएस ने उसके आवास से 25 किलोग्राम हाई-एंड हेरोइन भी बरामद की थी.
जांच के दौरान, यह पता चला कि साजी मोहन तस्करों से बरामद हेरोइन को बाजार में बेच देता था और उसकी जगह पर चूना या पाउडर रख देता था. साजी मोहन ने चंडीगढ़ एनसीबी के मलखान में रखे गए हेरोइन को पाने के लिए उसमें कुछ चूना और अन्य सामग्री मिलाई थी.
साजी मोहन एक सेना अधिकारी का बेटा है, जिन्हें राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया है और जो शांति सेना के साथ संयुक्त राष्ट्र में भी कम समय के लिए सेवा कर चुके हैं.