महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की मॉब लिंचिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. एक ओर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दोषियों को नहीं बख्शेंगे की बात कही है, तो दूसरी ओर लापरवाही के आरोप दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है. एक हाईलेवल कमेटी को मामले की जांच कर रही है. जांच में पुलिसिया लापरवाही की एक और पोल खुली है.
साधुओं की मॉब लिंचिंग से पहले की शाम पुलिस इंस्पेक्टर काले, एक डॉक्टर और तीन पुलिसकर्मियों पर ग्रामीणों ने हमला किया था. इसके बाद भी पुलिस की ओर से जरूरी कदम नहीं उठाए गए. न तो अफवाहों को रोकने की कोशिश की और न ही ग्रामीणों की अवैध पहरेदारी को हटाया गया. अगर उस वक्त कार्रवाई की गई होती तो शायद साधुओं के साथ घटना नहीं होती.
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मॉब लिंचिंग की घटना के बाद भी पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला किया था. घटना के बाद जब 17 अप्रैल को पुलिस टीम आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची तो ग्रामीणों ने फिर से पथराव किया. इस दौरान एसडीपीओ जवाहर ने दो राउंड फायरिंग की और लोगों को तितर-बितर किया. इसके बाद से अब तक 110 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
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सीआईडी क्राइम को सौंपी गई जांच
महाराष्ट्र के डीजीपी ने कहा कि पालघर मामले में अब तक 110 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसमें 9 नाबालिग हैं. पूरे मामले की जांच सीआईडी क्राइम को सौंप दी गई है. इसके अलावा पुलिस स्टेशन की लापरवाही की जांच आईजी कोंकण कर रहे हैं. इस मामले में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड किए जा चुके हैं.
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'हिंदू-मुस्लिम जैसा कोई मामला नहीं'
इस बीच सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि ये हिंदू-मुस्लिम जैसा कोई मामला नहीं है, मेरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से भी बात हुई है. हर किसी को समझाया गया है कि ये धर्म से जुड़ा मामला नहीं है, लेकिन जो भी सोशल मीडिया के जरिए आग लगाने और मामला भड़काने की कोशिश करेगा उसपर कड़ा एक्शन लिया जाएगा.
क्या है मामला
16-17 अप्रैल की दरमियानी रात को पालघर से करीब 100 किलोमीटर दूर मॉब लिंचिंग की वारदात हुई. पालघर के गड़चिनचले गांव में मुंबई से सूरत जा रहे दो साधुओं और ड्राइवर की गाड़ी रोक कर जान ले ली. भीड़ के हत्थे चढ़े साधु मुंबई के जोगेश्वरी स्थित हनुमान मंदिर के थे. दोनों साधु मुंबई से सूरत अपने गुरू के अंतिम संस्कार में जा रहे थे.