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ANALYSIS: अभी ट्रायल कर रहे थे ISIS आतंकी, जानें क्यों सॉफ्ट टारगेट है रेलवे?

भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में मंगलवार सुबह हुआ बम ब्लास्ट महज ट्रायल था. आतंकी इस ब्लास्ट के बाद एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे. लखनऊ में आईएसआईएस आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद यूपी एटीएस ने खुलासा किया है कि 27 मार्च को आतंकी बाराबंकी में एक बड़ी वारदात साजिश रच रहे थे. इसके लिए पिछले तीन महीने से तैयारी की जा रही थी. लेकिन भोपाल ट्रेन ब्लास्ट के बाद पोल खुल गई.

ट्रेन पर आतंकियों की लंबे समय से नजर है ट्रेन पर आतंकियों की लंबे समय से नजर है

भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में मंगलवार सुबह हुआ बम ब्लास्ट महज ट्रायल था. आतंकी इस ब्लास्ट के बाद एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे. लखनऊ में आईएसआईएस आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद यूपी एटीएस ने खुलासा किया है कि 27 मार्च को आतंकी बाराबंकी में एक बड़ी वारदात साजिश रच रहे थे. इसके लिए पिछले तीन महीने से तैयारी की जा रही थी. लेकिन भोपाल ट्रेन ब्लास्ट के बाद पोल खुल गई.

पिछले कुछ समय से भारतीय रेलवे लगातार आतंकियों के निशाने पर रही है. पिछले साल यूपी के कानपुर में हुए रेल हादसों के बाद से ही इस बात का खुलासा हुआ था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकी गतिविधियों के लिए ट्रेन को टारगेट कर रही है. इसके बाद आईएसआईएस आतंकी द्वारा हाल में किए गए इस ब्लास्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिरकार भारतीय रेलवे को ही सबसे सॉफ्ट टारगेट क्यों बनाया जा रहा है.

बताते चलें कि रेलवे भारत में यातायात का सबसे बड़ा माध्यम है. इसे लाइफलाइन कहा जाता है. लाखों लोग रोज ट्रेन से यात्रा करते हैं. ऐसे में आतंकियों को लगता है कि ट्रेन को निशाना बनाकर अधिक से अधिक जान-माल का नुकसान करके अपने मकसद में कामयाब हुआ जा सकता है. चूंकि रेलवे के विस्तार और विस्तृत रूप को देखते हुए यहां किसी भी आतंकवादी साजिश को अंजाम देना आतंकियों के लिए कहीं और से अधिक सुलभ और आसान है.

रेलवे को बनाया सॉफ्ट टारगेट
कानपुर रेल हादसे के बाद जांच के दौरान आतंकी कनेक्शन की बात पता लगने पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं. उस समय नेपाल से गिरफ्तार आईएसआई के खास गुर्गे शमसुल हुदा ने बताया था कि आईएसआई अपनी नई रणनीति के तहत भारतीय रेलवे को टारगेट करके अधिक से अधिक आतंकी गतिविधियों को कामयाब बनाना चाहता है. हुदा ने ही 1 अक्टूबर, 2016 को बिहार के मोतिहारी में रेलवे ट्रैक पर शक्तिशाली बम धमाके की साजिश रची थी.

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लखनऊ का बक्सर कनेक्शन
पिछले महीने 6 फरवरी को बिहार के बक्सर में पटरी पर जोरदार धमाका हुआ था. इसमें कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन इसके तार आतंक से जुड़े थे. घटनास्थल पर अखबार के अधजले पन्ने मिले, जो 17 जनवरी के लखनऊ एडिशन के थे. चूंकि लखनऊ में सक्रिय आतंकी तीन महीने से यहां रहे थे. ऐसे में उनका हाथ इस वारदात में होना संभव है. अब सावल यह भी खड़ा होता है कि क्या ये आतंकी लगातार बड़ी साजिश को अंजाम देने के फिराक में थे.

ट्रैक पर जिलेटिन की छड़ें
पिछले साल ही महाराष्ट्र के नवी मुंबई के तलोजा पुलिस स्टेशन इलाके में रेलवे ट्रैक के नीचे जिलेटिन की छड़ें मिलने से सनसनी मच गई थी. हालांकि, राहत की बात ये रही कि इन्हें डेनोटर से नहीं जोड़ा गया था, वहीं जिलेटिन की छड़ें काफी पुरानी थी. वहीं, यूपी के संभल में चंदौली-अलीगढ़ रेलवे ट्रैक पर कटाव के निशान मिले थे. यहां भी सावधानी की वजह से बड़ा हादसा टल गया था. महाराष्ट्र के अकोला में पटरी पर बड़ा पत्थर रखने कि घटना सामने आई थी.

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ऐसे टला बड़ा ट्रेन हादसा
बिहार के खगड़िया में नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस के गुजरने से पहले ही ग्रामीणों द्वारा ट्रैक टूटी होने की जानकारी मिलने से एक बड़ा ट्रेन हादसा टल गया. बरौनी-कटिहार रेलखंड पर खगड़िया के बख्तियारपुर गांव के पास लोगों ने सुबह टूटी रेल पटरी देखी थी. असम के उत्तरी कछार पहाड़ी जिले में संदिग्ध आतंकियों द्वारा किए गए एक शक्तिशाली बम विस्फोट के बाद बराक वैली एक्सप्रेस के 3 डिब्बे पटरी से उतर गए थे. कोई हताहत नहीं हुआ था.

 

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