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हिमाचल के उना में एग्जाम सेंटर सुपरिंटेंडेंट ने ही लीक किए थे CBSE के हैंड रिटेन पेपर

यह गिरफ्तारी परीक्षा से तीन दिन पहले ही 12वीं का इकोनॉमिक्स का हैंडरिटेन पेपर लीक करने के मामले में हुई है.

पीली टी शर्ट में है 12वीं के इकोनॉमिक्स के पेपर लीक का मास्टरमाइंड पीली टी शर्ट में है 12वीं के इकोनॉमिक्स के पेपर लीक का मास्टरमाइंड

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के क्वेश्चन पेपर लीक मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हिमाचल प्रदेश के एक स्कूल से तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर लीक करने के आरोप में तीनों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में उना के डीएवी स्कूल का एक टीचर, एक क्लर्क और एक चपरासी शामिल है.

स्कूल टीचर राकेश है मास्टरमाइंड

पुलिस के मुताबिक, यह गिरफ्तारी परीक्षा से तीन दिन पहले ही 12वीं का इकोनॉमिक्स का हैंडरिटेन पेपर लीक करने के मामले में हुई है. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किया गया उना के डीएवी स्कूल का टीचर राकेश है, जो पेपर लीक मामले का मास्टरमाइंड है.

आपको बता दें कि सीबीएसई के क्वेश्चन पेपर स्थानीय बैंक के लॉकर में बंद रहते हैं, जिसे सेंटर सुपरिटेंडेंट लॉकर से बाहर निकाल सकता है. उना में ये क्वेश्चन पेपर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर में बंद थे, जिसे सिर्फ राकेश ही बाहर निकाल सकता था. राकेश ही बैंक से निकालकर क्वेश्चन पेपर एग्जाम सेंटर तक पहुंचाता था.

दिल्ली क्राइम ब्रांच के मुताबिक उना के डीएवी कॉलेज में एग्जाम सुपरिटेंडेंट नियुक्त हुए राकेश ने 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर 23 तारीख को ही बैंक से बाहर निकाल लिया था, जबकि परीक्षा 26 मार्च को होनी थी.

कंप्यूटर के पेपर के साथ निकाल लिए इकोनॉमिक्स के पेपर

दरअसल 23 मार्च को 12वीं का कंप्यूटर का पेपर था. एग्जाम सेंटर सुपरिटेंडेंट राकेश कंप्यूटर का पेपर निकलने बैंक गया हुआ था. कंप्यूटर का पेपर निकालने के दौरान ही मौका देखकर राकेश ने 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर भी निकाल लिया.

राकेश दोनों विषयों के पेपर निकालकर सीधा एग्जाम सेंटर पहुंचा और 12वीं के इकोनॉमिक्स के पेपर स्कूल के क्लर्क अमित और चपरासी अशोक को दे दिए. बस यहीं से शुरू हुआ एग्जाम से तीन दिन पहले इकोनॉमिक्स के पेपर लीक का सिलसिला.

एक छात्र से क्वेश्चन पेपर को लिखवाया

आरोपियों अशोक और अमित ने इकोनॉमिक्स के पेपर जवाहर नवोदय विद्यालय ले गए, जहां अमित ने एक छात्र की मदद से पूरा पेपर लिखवा लिया. इसके बाद अमित ने हाथ से लिखे पेपर्स सेंटर सुपरिटेंडेंट राकेश को व्हाट्सएप्प के ज़रिए भेज दिया.

कोचिंग सेंटर चलाता है मुख्य आरोपी टीचर

क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी राकेश स्कूल से बाहर कोचिंग चलाता था और उसका एक छात्र इकोनॉमिक्स में बेहद कमजोर था. उसी छात्र की मदद के लिए राकेश ने इकोनॉमिक्स का पेपर लीक किया.

हालांकि राकेश का मकसद सिर्फ एक छात्र की मदद करना भर नहीं था. राकेश ने चंडीगढ़ में रहने वाली अपनी एक महिला रिश्तेदार के 12वीं में पढ़ने वाले बच्चे के लिए क्वेश्चन पेपर व्हाट्सऐप के जरिए उन्हें भेजे.

दिल्ली पुलिस की मानें तो इकोनॉमिक्स के एग्जाम से 3 दिन पहले लीक हुआ हैंडरिटेन पेपर 40 से भी ज्यादा व्हाट्सऐप ग्रुप को भेजे गए. हालांकि अभी दिल्ली पुलिस को 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर लीक करने के इस मामले में पैसों के लेन-देन के सुबूत नहीं मिले हैं.

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