देश में 24 मई वाले हफ्ते में बेरोजगारी और बढ़ गई है. इस दौरान बेरोजगारी की दर 24.3 फीसदी रही, जो एक हफ्ते पहले के 24 फीसदी के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है. पूरे लॉकडाउन के दौरान बेरोजगारी की औसत दर 24 फीसदी के करीब रही है.
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है. यह आंकड़ा एक तरह का रिकॉर्ड ही है, क्योंकि इसके पहले के महीनों की बात करें तो बेरोजगारी की दर 5-6 फीसदी ही हुआ करती थी.
शहरी बेरोजगारी ज्यादा
लॉकडाउन के बीच पिछले 8 हफ्तों में बेरोजगारी की औसत दर 24.2 फीसदी रही है. 25 मई तक देश में औसत बेरोजगारी दर 24.5 फीसदी रही. इस दौरान शहरी बेरोजगारी दर 26.3 फीसदी और ग्रामीण बेरोजगारी दर 23.7 फीसदी रही. सीएमआईई के अनुसार पूरे मई महीने के दौरान ग्रामीण बेरोजगारी के मुकाबले शहरी बेरोजगारी दर ज्यादा देखी गई.
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पूरे लॉकडाउन में 24 फीसदी रही बेरोजगारी दर
CMIE के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ महेश व्यास ने कहा, 'लॉकडाउन के दौरान बेरोजगारी की दर 24 फीसदी के आसपास स्थिर रही है, लेकिन श्रम भागीदारी दर को देखें तो आपको लेबर मार्केट में कई रोचक बदलाव देखने को मिलेंगे.'
बेरोजगारी ने बनाया था रिकॉर्ड
कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से भारत में लोगों के रोजगार में जबरदस्त कमी आ गई है. इसके पहले सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार, 3 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी दर बढ़कर रिकॉर्ड 27.11 फीसदी तक पहुंच गई थी. यानी हर चार में से एक व्यक्ति बेरोजगार हो गया. यह देश में अब तक की सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर है.
पिछले साल एनएसएसओ की रिपोर्ट जब लीक हुई थी तब काफी हंगामा हुआ था जिसमें कहा गया था कि बेरोजगारी की दर 45 साल के स्तर पर पहुंच गई. इसके मुताबिक वर्ष 2017-18 में देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही जो 45 साल में सर्वाधिक है. लेकिन अब तो सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. हालांकि एनएसएसओ की रिपोर्ट को सरकारी तौर पर पुख्ता माना जाता है, क्योंकि सीएमआईई एक निजी संस्था है.
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नौकरी की तलाश कम कर रहे लेबर
सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार, 'अब लेबर उस हालत में है कि नौकरी करना तो चाहता है लेकिन उसकी तलाश नहीं कर रहा, जबकि पहले वह नौकरी करना भी चाहता था और उसकी तलाश में भी रहता था.'
सीएमआई ने कहा कि अच्छी खबर यह है कि बहुत से हताश कामगार अब फिर नौकरी की तलाश में वापस आ रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, जो लोग लेबर मार्केट में वापस आ रहे हैं, उन्हें काम भी मिल रहा है.
पिछले हफ्ते के आंकड़ों में श्रम भागीदारी दर में भी गिरावट देखने को मिला है. इस दौरान श्रम भागीदारी दर 38.7 फीसदी रही, जबकि इसके एक साल पहले यह 38.8 फीसदी थी. ऊंची बेरोजगारी दर का मतलब यह है कि बड़ी संख्या में श्रमिक काम की तलाश में हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा. श्रम भागीदारी दर में गिरावट का मतलब यह होता है कि कम लोग काम करने के इच्छुक हैं. अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा 75.8 फीसदी बेरोजगारी पुदुच्चेरी में देखी गई, जबकि तमिलनाडु में यह 49.8 फीसदी रही.