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कमाई के मामले में IOC से आगे निकली RIL, 10 साल बाद हासिल की उपलब्‍धि

कमाई के मामले में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पब्लिक सेक्टर कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को पछाड़ दिया है.

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मुकेश अंबानी की कंपनी का नया मुकाम
मुकेश अंबानी की कंपनी का नया मुकाम

  • इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की 10 साल की बादशाहत खत्‍म हो गई है
  • RIL ने वित्‍त वर्ष 2018-19 में 41.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्‍ट्रीज (आरआईएल) ने एक और मुकाम हासिल किया है. दरअसल, आरआईएल अब कमाई के मामले में फॉर्च्‍यून इंडिया 500 की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है. इस बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की सहायक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट्स एंड होल्डिंग्स लिमिटेड (आरआईआईएचएल) ने कनाडा की कंपनी ब्रुकफील्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ 25,215 करोड़ रुपये निवेश का करार किया है. यह निवेश कंपनी के टावर इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट में किया जाएगा.

इंडियन ऑयल की बादशाहत खत्‍म

फॉर्च्‍यून इंडिया 500 के मुताबिक कमाई के मामले में आरआईएल ने पब्लिक सेक्टर कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की 10 साल की बादशाहत खत्‍म कर दी है. फॉर्च्यून इंडिया की ओर से बताया गया है कि रेवेन्‍यू के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्‍त वर्ष 2018-19 में 41.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है.

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यह इंडियन ऑयल के मुकाबले 8.4 फीसदी अधिक है. इस दौरान रिलायंस इंडस्‍ट्रीज को 5.81 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू हासिल हुआ तो वहीं इंडियन ऑयल का राजस्‍व  5.36 लाख करोड़ रुपये रहा. यही नहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस दौरान 39,588 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ. इस मामले में भी इंडियन ऑयल काफी पीछे है.

तीसरे स्‍थान पर ओएनजीसी

आरआईएल और इंडियन ऑयल के बाद कमाई के मामले में तीसरे स्‍थान पर सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) रही. वहीं भारतीय स्टेट बैंक, टाटा मोटर्स और भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का स्थान रहा. वर्ष 2018 और 2019 में इनकी रैकिंग में कोई बदलाव नहीं आया.

जबकि राजेश एक्सपोर्टस सातवें स्थान पर रही. वह एक पायदान ऊपर चढ़ी है. इसी तरह टाटा स्टील, कोल इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सविर्सिज और लार्सन एण्ड टुब्रो भी एक स्थान ऊपर चढ़कर क्रमश 8वें, 9वें, 10वें और 11वें स्थान पर पहुंच गए. आईसीआईसीआई बैंक दो पायदान चढ़कर 12वें स्थान पर पहुंच गया जबकि हिन्डाल्को इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक का स्थान इसके बाद रहा. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच विलय, सार्वजनिक उपक्रमों में विलय सहित अन्य कारणों से 57 कंपनियां इस सूची से बाहर हो गई हैं. हालांकि इस दौरान फार्च्‍यून 500 की कंपनियों का कुल घाटा कम हुआ है.

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