कोरोना संकट से पहले भी देश में बढ़ती बेरोजगारी एक बड़ी समस्या थी, सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. इस बीच एक आंकड़ा सामने आया है, जिसमें कहा गया 2018 के मुकाबले 2019 में स्थिति बेहतर हुई.
ग्रामीण-शहरी बेरोजगारी दर में सुधार
Ministry of statistics की रिपोर्ट के मुताबिक 2017-18 के मुकाबले 2018-19 में ग्रामीण बेरोजगारी दर में -0.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. 2017-18 में बेरोजगारी दर 5.3 फीसदी थी, जो 2018-19 में घटकर 5 फीसदी रह गई. वहीं शहरी बेरोजगारी दर में भी साल-दर-साल में गिरावट आई है. 2017-18 में शहरी बेरोजगारी दर 6.2 फीसदी थी, जो 2018-19 में घटकर 6 फीसदी हो गई.
सांख्यिकी मंत्रालय के द्वारा जारी आंकड़ों को देखें तो SC/ST और अल्पसंख्यक समुदाय में 2017-18 के मुकाबले 2019 में बेरोजगारों दर में बढ़ोतरी हुई है.मुस्लिम समुदाय में साल 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.8 फीसदी थी, जो 2018-19 में 7.3 फीसदी हो गई.

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शहर में हर चौथी महिला बेरोजगार
आंकड़ों के मुताबिक शहर में हर चौथी महिला बेरोजगार है, जबकि शहर में युवा की बात की जाए तो हर पांचवां नौजवान बेरोजगार है. अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के बीच बेरोजगारी दर वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान बढ़ी है. SC में बेरोजगारी दर 6.3 से बढ़कर 6.4 फीसदी पहुंच गई, जबकि ST में 4.3 फीसदी से बढ़कर 4.5 फीसदी हो गई है.
हालांकि इस दौरान ओबीसी कैटेगरी में 6 फीसदी के मुकाबले 5.9 फीसदी बेरोजगारी दर दर्ज की गई. वहीं दूसरी जातियों में बेरोजगारी दर पिछले साल की तुलना में 6.7 फीसदी से घटकर 5.9 फीसदी हो गई. शिक्षित 15-29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर 17.3 फीसदी दर्ज की गई. सबसे ज्यादा ईसाई और सिखों में बेरोजगारी दर दर्ज की गई है.
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महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण दोनों इलाके में महिलाओं की भागीदारी में तेजी आई थी. जुलाई 2018 से जून 2019 में फीमेल पार्टिसिपेशन रेट 18.6 फीसदी था. ठीक एक साल पहले यह रेट 17.5 फीसदी था.