सोने की कीमतों में जारी गिरावट के चलते इस महीने सोने का आयात पिछले साल के इसी महीने की तुलना में करीब 25 प्रतिशत तक घटकर करीब 53.25 टन रहने की संभावना है.
बांबे बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहित कंबोज ने बताया, ‘इस महीने सोने का आयात पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 25 प्रतिशत तक कम रहने का अनुमान है क्योंकि सोने की कीमतें लगातार गिर रही हैं.’
उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर जब कीमतें घटती हैं तो व्यापारी और गिरावट आने की आशंका में रुका रहता है। वहीं जब कीमतें चढ़ती हैं तो कीमतें और चढ़ने की आशंका में खरीदारी करता है.’
अप्रैल, 2012 में सोने का आयात करीब 71 टन रहा था. उन्होंने कहा कि कीमतें स्थिर होने पर सोने का आयात फिर बढ़ेगा.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम घटने और मांग बढ़ने के बीच इस कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात 250 टन रहा जबकि इससे पिछले साल इसी अवधि में आयात 207 टन रहा था. साल 2011-12 में भारत का स्वर्ण आयात 12 प्रतिशत घटकर 864.2 टन रहा.
इस बीच, सोने के गिरते दाम को देखते हुये ‘गोल्ड ईटीएफ’ को भुनाने का दबाव बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है. वैश्विक बाजार में सोने के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) का दबाव पहले ही महसूस किया जा रहा है, इसे देखते हुये यहां भी कोषों ने आज कहा कि यदि कीमतें गिरती रहीं तो विमोचन के लिये दबाव बढना स्वाभाविक है.
आईसीआईसीआई पड्रेंशियल में उत्पाद प्रमुख और संचार के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एम.एफ. हिमांशु पांडया ने कहा, ‘ साल 2007 से 2011 की अवधि के मुकाबले पिछले वित्तीय वर्ष में गोल्ड-ईटीएफ में विमोचन का दबाव देखा गया है. सोने के दाम में जारी भारी गिरावट को देखते हुये यह दबाव और बढ़ सकता है.
हालांकि, भारी मात्रा में गोल्ड ईटीएफ भुनाने की संभावना कम ही दिखाई देती है, क्योकि प्रतिभूति विविधीकरण के लिहाज से सोना अभी भी एक महत्वपूर्ण वर्ग में आता है.’