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हड़ताल से अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये का नुकसान

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने गुरुवार को कहा कि डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के फैसले के विरुद्ध आहूत गुरुवार की देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है.

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भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने गुरुवार को कहा कि डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के फैसले के विरुद्ध आहूत गुरुवार की देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है.

सीआईआई ने कहा कि गुरुवार के बंद से देश के कई हिस्से में व्यवसाय और व्यापार का नुकसान हुआ. नुकसान का निश्चित आंकड़ा पता नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन यह अनुमान है कि उत्पादन और व्यापार के प्रभावित होने से देश को 12,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. औद्योगिक संगठनों ने कहा कि सरकार को राजनीकि दबाव में सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए.

सीआईआई ने कहा कि अच्छी आर्थिक सोच से अच्छी राजनीति नहीं हो सकती है. इसलिए आम आदमी को सुधार के सरकार के फैसले के सकारात्मक पहलुओं के बारे में बताया जाना जरूरी है.

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सरकार के फैसले के विरुद्ध आश्चर्यजनक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथी पार्टियों के नेता साथ हो गए. सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के कुछ सहयोगियों खासकर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया लेकिन उन्होंने बंद को समर्थन नहीं दिया.

सीआईआई के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने उम्मीद जताई की विभिन्न पार्टियां देश में चिर प्रतीक्षित आर्थिक सुधार लाने के लिए काम करेंगी.

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